बीकानेर, 18 दिसम्बर। राज्य सरकार के कार्यकाल के चार वर्ष पूर्ण होने पर फोर्ट स्कूल मैदान में आयोजित ’सुराज प्रदर्शनी’ का सोमवार को बड़ी संख्या में आमजन ने अवलोकन किया। इस अवसर पर संभाग स्तरीय अमृता हाट के तीन वर्ष पूर्ण होने पर केक काटकर खुशियां मनाईं।
महिला अधिकारिता विभाग की सहायक निदेशक मेघा रतन, महिला सलाह व सुरक्षा केन्द्र की मंजू नागल व प्रचेता विजय लक्ष्मी जोशी आदि ने केक काटा तथा प्रदर्शनी अवलोकन करने आए अतिथियों व आम दर्शक से ’बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत हस्ताक्षर करवाए। हस्ताक्षर के दौरान लोगों ने ’बेटिया हैं अनमोल’, ‘बेटी करे यही पुकार, जीवन, पोषण, सम्मान’ और ‘मानवता की कैसी भूल, लिंग अनुपात प्रतिकूल’ जैसे श्लोगन लिखकर अपनी ओर से संदेश दिए। वहीं कुछ लोगों ने कार्टून व लघु चित्रों के माध्यम से अपनी बात रखी।
महिला अधिकारिता विभाग की सहायक निदेशक ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा महिला सशक्तीकरण के लिए किए गए प्रयासों में ‘अमृता हाट’ भी एक है। सरकार द्वारा पहल करते हुए संभाग स्तर पर अमृता हाट का आयोजन के निर्देश दिए गए। अब तक तीन बार आयोजित हुए अमृता हाट बाजार के दौरान प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक संबलन मिला। इससे महिलाओं मंे आत्मविश्वास की वृद्धि भी हुई।
आमजन ने चखा आंगनबाड़ी के पोषाहार का स्वाद
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से लगाई गई स्टाॅल में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर दिए जाने वाले पोषाहार का स्वाद अनेक लोगों ने चखा। स्टाॅल के माध्यम से ’नंद घर योजना’, ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, आदर्श आंगनबाड़ी केन्द्र तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर दी जाने वाली सेवाओं यथा शाला पूर्व शिक्षा, टीकाकरण, पूरक पोषाहार, स्वास्थ्य जांच, स्वास्थ्य व पोषण शिक्षा व संदर्भ सेवा की जानकारी दी गई है। समेकित बाल विकास सेवाओं के डिजिटिलाइजेशन आदि के साथ स्तन पान व उत्तम स्वास्थ्य के के संबंध में जानकारी प्रदर्शित की गई है। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 3 से छह वर्ष तक के बच्चों को दिए जाने वाले पोषाहार खींचड़ी, दलिया व गर्म पोषाहार, नाश्ते में दिए जाने वाले गुड़, चना व मुरमुरे, पोषाहार में लडडू, शकरपारे, हलुवा, खीर, केक, पंजीरी आदि को प्रदर्शित किया गया।
चित्रों में दिखी ‘सुराज’ की झलक
इस अवसर पर सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय की ओर से लगाई गई चित्र प्रदर्शनी में आमजन ने सुराज की झलक देखी। दो सौ से अधिक चित्रों के माध्यम से केन्द्र व राज्य सरकार की विकास गाथा का चित्रण किया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उदयपुर दौरे के दौरान विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास, रिसर्जेंट राजस्थान, ग्राम, एज्यूकेशन फेस्ट सहित विभिन्न नवाचारों की जानकारी प्रदर्शनी के माध्यम से आमजन को मिली। इस दौरान विभाग द्वारा प्रकाशित साहित्य का वितरण भी किया गया। मंगलवार को भी प्रदर्शनी का अवलोकन प्रातः 10 से सायं 5 बजे तक किया जा सकेगा।
देशभर के कृषि वैज्ञानिक बीकानेर में कर रहे हैं तकनीकी शब्दावली अपडेशन पर मंथन
बीकानेर, 18 दिसम्बर। देश के विभिन्न क्षेत्रों के कृषि वैज्ञानिक इन दिनों बीकानेर के स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में कृषि विज्ञान शब्दावली के अपडेशन को लेकर मंथन कर रहे हैं। मंगलवार को विश्वविद्यालय सभाकक्ष में इसकी अंतिम बैठक होगी।
विश्वविद्यालय के राजभाषा संपर्क अधिकारी डाॅ. नरेन्द्र कुमार पारीक ने बताया कि भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग के संयुक्त तत्वावधान् में तकनीकी शब्दावली के अपडेशन से संबंधित बैठकें 14 दिसम्बर से प्रारम्भ हुईं, जो मंगलवार तक चलेंगी। सोमवार को आयोजित बैठक में एसकेआरयू के कुलपति प्रो. बीआर छीपा ने बताया कि कृषि विज्ञान शब्दावली का अंतिम अपडेशन 1976 में हुआ। पिछले चालीस वर्षों में कृषि अध्ययन में बड़ा परिवर्तन हुआ है। इसे ध्यान में रखते हुए शब्दावली का अपडेशन अत्यंत आवश्यक हो गया था। उन्होंने कहा कि अपडेट शब्दावली के प्रकाशन से कृषि संस्थानों द्वारा विकसित तकनीक हिन्दी भाषा में प्रकाशित हो सकेगी। यह कृषि विज्ञान छात्रों के लिए अध्ययन के साथ वैज्ञानिकों, किसानों आदि के लिए लाभदायक सिद्ध होगी।
यह वैज्ञानिक ले रहे हैं भाग
इन बैठकों में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग के सहायक वैज्ञानिक डाॅ. शैलेन्द्र सिंह, इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. प्रवीन कुमार सिंह एवं डाॅ. राम रोशन शर्मा, शिमला के उद्यान विभाग के उपनिदेशक डाॅ. आर.के. धीमान, शेरे कश्मीर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जम्मू के डाॅ. सुशील गुप्ता, नई दिल्ली के डाॅ. डी.डी. नौटियाल, पालमपुर के डाॅ. सुदेश रादोत्रा, राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय उदयपुर के डाॅ. राजेन्द्र सिंह राठौड़ तथा सेवानिवृत प्रोफेसर गोविंद सिंह भाग ले रहे हैं। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.आर. छीपा के नेतृत्व में डाॅ. नरेन्द्र पारीक के अलावा सहायक प्रोफेसर डाॅ. विजय शंकर आचार्य तथा डाॅ. मनमीत कौर भी भागीदारी निभा रहे हैं।
देशभर में हो रही हैं बैठकें
वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग के सहायक वैज्ञानिक अधिकारी डाॅ. सिंह ने बताया कि आयोग द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों में बैठकें आयोजित कर सर्वमान्य प्रचलित शब्दों के संकलन के साथ पुरानी शब्दावली के संकलित शब्दों का विश्लेषण एवं अपडेशन किया जा रहा है। इससे कृषि वैज्ञानिकों को अपने अनुसंधान परिणाम हिन्दी में प्रकाशन करने के साथ संदर्भ साहित्य की रचना में सहायता मिलेगी। बैठकों के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए कृषि वैज्ञानिकों ने शब्दावली अपडेशन की आवश्यकता एवं इसके महत्त्व पर प्रकाश डाला।