सरपंच प्यारी रावत के जज्बे, संघर्ष ने जीत लिया मण्डावर

Untitledपूरे देश भर में शराबबंदी को लेकर चर्चित मंडावर गांव की सरपंच प्यारी रावत के जज्बे व संघर्ष की दास्तान जबरदस्त हैम जिसके चलते तीन वर्षों से चले आ रहर अभियान को पढ़ाई छोड़कर तथा आगामी महीने में होने वाली अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट) की तैयारी बीच में छोड़कर पूरी की पूरी ताकत मंडावर की इज्जत अस्मिता को बचाने के शराबबंदी अभियान में झोंक ली।
बात दरअसल यह है कि तीन वर्ष पूर्व मंडावर गांव में सरपंच पद हेतु चुनाव में 24 मजरों में फैले गांव में जनसंपर्क के दौरान शराब के प्रचलन की टिस महिलाओं ने बताई । महिलाओं और ग्रामीणों की टीस सरपंच प्यारी रावत के दिल में घर कर गई और ठान ली की सरपंच बनी तो मंडावर को शराब मुक्त करा कर ही दम लेगी। 24 जनवरी 2015 को सरपंच की बाजी तो जीत ली पर अब लक्ष्य बड़ा कठिन था । शराब मुक्त मंडावर का सपना देखने वाली सरपंच प्यारी रावत ने उचित अवसर की तलाश की। ऐसा ही हुआ 20 दिन बाद मंडावर गांव में आयोजित होने वाले विशाल महाशिवरात्रि मेले एवं भजन संध्या में अपना पत्ते खोलेखक और मंडावर को शराब मुक्त मंडावर बनाने की बात कही और लोगों को शराब छोड़ने की अपील की। इस अवसर पर प्रथम प्रयास में 100 से अधिक लोगों के शराब छोड़ने हेतु संकल्प पत्र भरवाए गए। धीरे-धीरे अभियान पूरे मंडावर क्षेत्र में फैलाया गया। लोगों को जागरुक किया गया। शराब के नशे से होने वाले नुकसान के बारे में अवगत कराया गया । शराब से दूर रहने की नसीहत दी जाने लगी । लोगों को शराब से नफरत होने लगी । अब उस मौके की तलाश थी कि गांव से शराब का ठेका कैसे हटाया जाए । इस पर विभिन्न तरीकों से शराब ठेका हटाने का निर्णय लिया जो सरपंच कार्यकाल के 3 वर्ष पूर्ण होने के 4 दिन पहले पूरा करके दिखाया।

महिला दिवस पर ठानी शराब मुक्त करना है मंडावर

8 मार्च 2017 को महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मानित होने के बाद जयपुर से लौटते समय गाड़ी में शराबबंदी के अभियान की व्यू रचना चलती गाड़ी में बनाई। 9 मार्च को शराबबंदी के लिए गांव-गांव, गली गली ग्रामीणों के हस्ताक्षर करवाने का अभियान छेड़ दिया। चार-पांच दिनों में पूरे मंडावर क्षेत्र के सैकड़ों नागरिकों ने इस अभियान में साथ देने का वादा किया। 15 मार्च 2017 को 500 से अधिक महिला पुरुषों ने राजसमंद जिला मुख्यालय पर शराब के खिलाफ आवाज बुलंद की और तत्कालीन जिला कलेक्टर अर्चना सिंह को ज्ञापन दिया। आबकारी कार्यालय राजसमंद पर हल्ला बोला और एक बार पूरे क्षेत्र में शराब के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत की।

प्रशासन ने की जानबूझकर की लेटलतीफी

मंडावर शराब मुक्ति आंदोलन ज्ञापन में 20 मार्च को होने वाली लॉटरी रोकने तथा 1 अप्रैल से नया ठेका नहीं खोलने की मांग की थी परंतु आबकारी विभाग व प्रशासन ने इस अभियान को दबाने की मंशा के चलते हुए टालमटोल रवैया अपनाया । इसके बाद लगातार विरोध, ज्ञापन, धरना, प्रदर्शन के चलते हुए 25 अप्रैल को ज्ञापन में दिए गए हस्ताक्षरों का भौतिक सत्यापन करवाया। मंडावर के 78 फ़ीसदी लोगों ने अपने हस्ताक्षर का भौतिक सत्यापन करवाकर एक तरफा शराबबंदी के अभियान पर मुहर लगा दी।

20 दिन में कराना था मतदान, कराया 9 माह बाद

शराबबंदी के भौतिक सत्यापन के 20 दिवस के अंतर्गत अंतिम मतदान करना आवश्यक था परंतु आबकारी विभाग की टालमटोल नीति एवं प्रशासन के ढुलमुल रवैया के चलते 20 दिवस के अंतर्गत अंतिम मतदान नहीं हो सका। इसके बाद करीब 9 माह बाद शराब बंदी के मतदान की तिथि काफी लंबे संघर्ष के बाद दी गई।

देवर की शादी, भतीजी की बीमारी व मौत और सरपंच को स्वाइन फ्लू ने रोकी शराबबंदी की मुहिम

मंडावर शराबबंदी की अगुवा सरपंच प्यारी रावत के देवर ललित किशोर सिंह की शादी मई में होने तथा जून में भतीजी के बीमार होने , जुलाई में मृत्यु होने , इसके बाद अगस्त में सरपंच प्यारी रावत को स्वाइन फ्लू होने से करीब 3 से 4 महीने तक अभियान को नहीं चला सके और अभियान ठंडा हो गया। अभियान को लेकर चारों तरफ से शराब माफिया से मिलीभगत करने, केवल सुर्खियां बटोरने की बात की फब्तियां कसी जाने लगी।

सितंबर में फिर पकड़ा जोर लगाता पत्राचार, मुलाकात ने बनाया दबाव

शराबबंदी अभियान को पुनर्जीवित करने के लिए सितंबर 2017 से सरपंच प्यारी रावत ने नए जोश के साथ शुरुआत की तथा आबकारी विभाग प्रशासन से शराबबंदी के लिए अंतिम मतदान के लिए प्रयास तेज किया। इसको लेकर भीम उपखंड अधिकारी भंवर लाल जनागल, राजसमन्द जिला कलेक्टर पीसी बेरवाल, आबकारी अधिकारी से लगातार पत्राचार व मुलाकात कर के अंतिम मतदान की तिथि घोषित करने की मांग जारी रखी।

सूचना के अधिकार से आया दबाव में आबकारी, मतदान तिथि घोषित की

शराबबन्दी अभियान के मुख्य सूत्रधार एवं मगरा विकास मंच अध्यक्ष जसवंत सिंह मंडावर ने आबकारी विभाग से मंडावर में शराबबंदी अभियान की अंतिम तिथि नहीं देने को लेकर व अन्य सूचना मांगे जाने के बाद 10 दिन में अंतिम मतदान की तिथि घोषित कर दी। जसवंत सिंह मंडावर ने बताया कि इस अभियान को प्रशासन दबाना चाह रहा था परंतु जब सूचना मांगी तो प्रशासन ने आनन-फानन में अंतिम मतदान की तिथि घोषित की। मतदान को लेकर प्रशासन ने नियम कायदे तोड़े थे।

6 जनवरी को हुई घोषणा, मंडावर में उत्साह का माहौल

शराबबंदी को लेकर 6 जनवरी को आबकारी विभाग व प्रशासन की ओर से 20 जनवरी को मतदान कराने की घोषणा की। इसकी सूचना मिलने पर मंडावर में महिला व ग्रामीण झूम उठे और उत्साह के साथ इस अभियान को अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए कसम खा ली । इसी तरह सुबह 5 बजे से लगाकर रात्रि 10 बजे तक महिलाओ , युवाओं ने सरपंच प्यारी रावत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस अभियान को जिताने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी । अंत में 20 जनवरी को आए परिणाम में मंडावर शराब माफिया व आबकारी विभाग में प्रशासन से जीत गया।

बिना चुनाव चिन्ह के मतदान, अनपढ़ महिलाओं के लिए चुनौती बना

शराबबंदी के अभियान में मतदान तो होना था परंतु इसमें कोई चुनाव चिन्ह नहीं होने से महिलाओं को खतरनाक चुनौती का सामना करना पड़ा। सरपंच प्यारी रावत ने इसका तोड़ निकालते हूए घर-घर जाकर अनपढ़ महिलाओं को हा व नही पढ़ना लिखना सिखाया । लोगों को मतपत्र पर मत देने के लिए मॉक प्रैक्टिस, मॉक पोल, बार बार अभ्यास करा कर जमीनी स्तर पर कार्य किया।
इसके बाद चुनाव घोषणा के समय जारी नमुना मतपत्र से भिन्न मतपत्र से मतदान होने की भनक मतदान दिवस पर सुबह लगी। इस पर सरपंच प्यारी रावत ने सभी महिलाओं को वोट देने के लिए रोक दिया और सुबह मतदान करके आये एक मतदाता से मतपत्र के प्रारूप, लम्बाई, चौड़ाई के बारे में जानकारी लेकर से हाथों हाथ मतपत्र के अनुरूप नया नमूना मतपत्र छपवाकर एक घंटे में महिलाओं को पुनः मतदान करने का प्रशिक्षित दिया और मतदान के लिए तैयार किया। अंतिम समय में बदले मतपत्र अनपढ़ महिलाओं को आई समस्या के बावजूद हाथों-हाथ प्रशिक्षण देकर मतदान के लिए तैयार किया। बार- बार प्रेक्टिस कराई गई।

पांच किलोमीटर में फैली ग्राम पंचायत, वाहनों पर आवाजाही पर लगाई पूर्ण रोक, इज्जत बचाने पैदल आना पड़ा मतदाताओं को

मंडावर ग्राम पंचायत क्षेत्र के 24 मजरों के लोगों को 5 किलोमीटर से अधिक से पैदल आने को मजबूर होना पड़ा क्योंकि शराबबंदी को लेकर होने वाले मतदान पर सभी मजरों में वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी। जिससे काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा। वाहनों की आवाजाही को लेकर सरपंच व प्रशासन के बीच टकराव भी हुआ। प्रशासन इस अभियान को हराने की मंसा को लेकर वाहनों पर रोक लगाई परंतु महिलाओं की दृढ़ इच्छाशक्ति , कार्यकर्ताओ की लंबी फ़ौज के चलते हुए मतदाता घर से निकले और पैदल चलते हुए मतदान केंद्र पहुंचे और बंपर वोटिंग करते हुए एक तरफा जीत दिलाई।

सोशल मीडिया पर हारने के लगाए जा रहे थे कयास, जीत पर चुप्पी साधी

मंडावर शराबबंदी आंदोलन को लेकर अलग-अलग तरह से लोगों ने हार के कयास लगाए जा रहे थे और कई लोग इस शराबबंदी अभियान को सोशल मीडिया तक ही सीमित मान रहे थे परंतु शराबबंदी की मतदान के बाद आए रिजल्ट के बाद सभी के होश उड़ गए और विरोधियों को एक बार तो ऐसा लगा जैसे कोई बड़ा उलटफेर हो गया हो । इधर के सरपंच प्यारी रावत कहती हैं की धरातल पर काम करने के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी इसका प्रचार प्रसार करके लोगों का समर्थन जुटाया था। मंडावर की जीत के पीछे पूरे मगरा क्षेत्र के शराबबंदी अभियान का राज छिपा था मंडावर की हार ने मगरा क्षेत्र के अभियान की हार माना जाता पर अब मंडावर की जीत के बाद पूरे मगरा क्षेत्र में शराबबंदी अभियान से जुड़ी महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा।

रीट की तैयारी छोड़ लगी शराबबंदी अभियान में सरपंच

सरपंच प्यारी रावत राजनीति विज्ञान, समाज शास्त्र व हिंदी तीन विषयों में स्नातकोतर होने के साथ बी. एड कर रखी है और लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी हुई है । इसी तरह आगामी महीने में आयोजित होने वाली अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट )की तैयारी में जुटी प्यारी रावत को जब शराबबंदी की तारीख की सूचना मिली तभी से पढ़ाई छोड़कर दिन-रात शराबबंदी अभियान में जुट गई और इस को अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाकर मंडावर को जीता दिया।

पति जसवन्त सिंह संघ के कैंप में थे, घर पहुँचे तो मिली सूचना

इधर सरपंच प्यारी रावत के पति, मगरा विकास मंच अध्यक्ष जसवंत सिंह मंडावर भी इस शराबबंदी अभियान के मुख्य सूत्रधार और शराबबंदी के अंतिम मतदान की घोषणा के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रशिक्षण में गए हुए थे । जब घर लौटे तो शराब बंदी के मतदान की घोषणा पर खुश हुए।

सोशल मीडिया को बनाया हथियार, अकल्पनीय जीत दर्ज कर बनाया रिकॉर्ड

सरपंच प्यारी रावत व शराबबंदी आंदोलन के मुख्य सूत्रधार जसवंत सिंह मंडावर ने शराबबंदी आंदोलन के लिए सोशल मीडिया को मुख्य हथियार बनाते हुए कार्य किया और गांव गांव गली गली जाकर बच्चे, युवा ,बुजुर्ग, महिलाओं से सीधा संपर्क साधा और इस अभियान में जुड़ने के लिए निवेदन किया। मंडावर की जीत के मायने समझाने के साथ-साथ मगरा क्षेत्र में जीत के महत्व को समझाया और अंततोगत्वा मंडावर के सभी मतदाताओं ने साथ दिया और मंडावर की जीत सुनिश्चित की।

प्रवासी मतदाता पहुंचे घर ,हुई बंपर वोटिंग

मंडावर शराबबंदी को लेकर राजस्थान राज्य से बाहर व्यवसायरत लोगों से संपर्क करके मतदान के लिए बुलाया गया और इसके लिए बंगलोर ,चेन्नई, इचलकरंजी, मुंबई ,सूरत, बड़ौदा, अहमदाबाद, राजकोट, मोरबी, जोधपुर, पाली, जयपुर ,अजमेर, भीलवाड़ा, उदयपुर, केलवा, आमेट, सोजत सहित अन्य शहरों में काम करने वाले सभी मतदाता मंडावर पहुंचे और इस सामाजिक बुराई को मिटाने में आहुति दी।

प्रवासी सेन समाज पहुंचा मंडावर

मंडावर में शराबबंदी को लेकर अभियान जोर शोर से चला मंडावर गांव में अधिकतर रावत राजपूत समाज के लोग रहते हैं। इसके अतिरिक्त जैन, सालवी, खटीक, लोहार, प्रजापत, तेली, सेन , भाट, भील समाज के लोग भी कहते हैं। वही सैन समाज के अधिकतर लोग गुजरात में व्यवसाय करते हैं। सेन समाज की एकजुटता को दिखाते हुए 25 से अधिक मतदाता एक साथ मंडावर पहुंचे और मंडावर के इस महत्वपूर्ण अभियान में मतदान किया।

विभिन्न संघठनो ने दिया सहयोग

मंडावर शराबबंदी आंदोलन को लेकर विभिन्न संगठनों ने पूर्ण सहयोग किया तथा गांव में रैली नुक्कड़ ,नाटक, गीत ,संगीत, जागरूकता संदेश के माध्यम से ग्रामीण जनता को जागरुक किया। अभियान में मजदूर किसान शक्ति संगठन देवडूंगरी, अणुव्रत आंदोलन राजसमंद, पतंजलि योग समिति राजसमंद, राजस्थान रावत राजपूत महासभा जयपुर, क्षत्रिय रावत परिषद ब्यावर, रावत सेना ब्यावर, शहीद देवी सिंह नवयुवक मंडावर, चौबीस गांव समाज सुधार समिति, काछबली शराब मुक्त समिति, रावत राजपूत संदेश ब्यावर, भास्कर सरोकार, पत्रिका अभियान, रावत राजपूत सर्कलसभा कामलीघाट, छापली, भीम, थानेठा, दिवेर, बरजाल, सर्कल सभा मंडावर, सालवी युवा समिति , मगरा विकास मंच राजस्थान आदि संगठनों का अभूतपूर्व योगदान रहा।

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