दरगाह में आज बंसत उत्सव के अवसर पर एक सरसौं के फूलों का गुलदस्ता चढ़ाया

Dargaahअजमेर, 23 जनवरी। विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में आज बंसत उत्सव के अवसर पर एक सरसौं के फूलों का गुलदस्ता चढ़ाया। इस मौके पर दरगाह के निजाम गेट से दरगाह के शाही कव्वाल बसंत के गीत गाते हुए आहता-ए-नूर तक आये जहां पर बैठकर सूफियाना कलाम पेश किये और ख्वाजा साहब के मजार पर गुलदस्ता चढ़ाया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विभिन्न धर्मों के लोग व खुद्दाम-ए-ख्वाजा उपस्थित थे। ख्वाजा साहब के गद्दीनशीन एस. एफ. हसन चिश्ती ने बताया कि सूफियों की परम्परा रही है कि हर सूफी संत की दरगाह में बसंत के अवसर पर सरसों के फूलों का गुलदस्ता चढ़ाया जाता है व महफिल-ए-कव्वाली होती है। कव्वाली में फारसी में लिखे हुए बसंत के गीत गाये जाते है। हसन चिश्ती व सामूहिक रुप से खुद्दाम-ए-ख्वाजा ने मुल्क की खुशहाली व विश्व में अमन शांति की दुआ की। बसंत उत्सव पर कई सूफी संतों ने अपने-अपने कलाम लिखे हैं इन्हीं कलामों को दरगाह में कव्वाली के अन्दाज में पेश किये गये एवं सूफिया कलाम भी पढ़े गये।

(एस. एफ. हसन चिश्ती)
गद्दीनशीन ख्वाजा साहब

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