साहित्य में चोरी की आदत खतरनाक

साहित्य में चोरी की प्रवर्ती खतरनाक है कई लोग जो अपने आप को साहित्यकार कहलाना पसंद करते हैं वे दूसरों की लिखी रचनाओं को अपने नाम से प्रकाशित करवा कर आत्म संतुष्टि प्राप्त करतें हैं. यह स्थिति वर्तमान साहित्य जगत के लिए ठीक नही है ये विचार उत्तर पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ अभियन्ता और कवि और गीतकार इंजिनियर निर्मल कुमार शर्मा ने आज कादम्बिनी क्लब द्वारा स्थानीय होटल मरुधर हेरिटेज के विनायक सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अथिथि के रूप में व्यक्त किये. इस कार्यक्रम में वर्तमान साहित्य के विविध आयाम विषय पर परिचर्चा और त्रिभाषा काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया.इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए समाज सेवी और साहित्यानुरागी श्री नेमचंद गहलोत ने साहित्य में माँ पर केन्द्रित रचनाओं पर विचार व्यक्त किये और माँ के विभिन्न रूपों को प्रकट करने वाली अपनी एक कविता भी प्रस्तुत की. कार्यक्रम के प्रारम्भ में क्लब के संयोजक डॉ. अजय जोशी ने विषय प्रवर्तन करते हुए वर्तमान परिवेश में साहित्य सृजन की विविध दिशाओं का विवेचन करते हुए कहा कि इन दिनों व्यंग्य साहित्य भी काफी रचा जा रहा है. श्री मुनीन्द्र प्रकाश अग्निहोत्री ने साहित्य में होने वाले नवाचारों की चर्चा की.
कार्यक्रम में डॉ. जगदीश दान बारहठ ने हर बात को भूलो पर माँ को मत भूलो कविता सुनाई.कवि कथाकार श्री राजाराम स्वर्णकार ने अपनी कविता में मौन के साथ सोता हूँ और शब्दों के साथ जगता हूँ सुनाई. श्री मोहनलाल जांगिड ने स्पंदन के अंतर्गत वर्तमान परिवेश पर आधारित अपनी छोटी छोटी रचनाएं प्रस्तुत की. डॉ. कृष्ण आचार्य ने बसन्त छायो रे शीर्षक की अपनी राजस्थानी रचना प्रस्तुत की. शायर असद अली असद ने उर्दू में आपनी शायरी और ग़ज़ल पेश की. श्री नागेन्द्र नारायण किराडू ने अपने पिता डॉ. भगवान् दास नवीन को समर्पित रचना प्रस्तुत की. इस अवसर पर क्लब के संयोजक डॉ. अजय जोशी का हाल ही में प्रकाशित व्यंग्य संग्रह “मैं आम आदमी हूँ” की प्रतियाँ भी सदस्यों को भेंट व्यवसाई हेमचन्द बांठिया सहित कई साहित्य प्रेमियों ने साहित्य के विविध आयामों की चर्चा की और अपनी काव्य रचनाएँ सुनाई. इस कार्यक्रम का संचालन श्री नगेन्द्र नारायण किराडू ने किया और आभार ज्ञापन श्री राजाराम स्वर्णकार ने किया.
डॉ. अजय जोशी
संयोजक
मो ९४१४९६८९००

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