स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हो रहा महिला-सशक्तीकरण

बीकानेर के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अब आत्मनिर्भर हो रही हैं। वे स्वयं सहायता समूह से जुड़कर, अपनी आय बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्य करते हुए, स्वयं की अलग पहचान स्थापित कर रही हैं। स्वयं सहायता समूह के सदस्य नियमित रुप से बैठक एवं छोटी-छोटी बचत करते हैं। बचत की राशि को सदस्यांे मंे आवश्यकतानुसार ऋण के तौर पर दिया जाता है। ऋण की अदायगी हेतु मासिक किस्त एवं ब्याज का निर्धारण भी समूह के सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से किया जाता है। समूह की कार्यप्रणाली आपसी समन्वय, विश्वास और सहकारिता की भावना पर आधारित होती है। समूहों को ग्राम स्तर के संगठन के उपरान्त क्षेत्राीय स्तर के सहकारी संगठन से जोडा जाता है। इस प्रकार सामाजिक एवं आर्थिक रुप से पिछडे़ वर्ग को विकसित करने का यह एक अभिनव तरीका है।
बीकानेर मंे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अब तक 2 हजार 405 स्वयं सहायता समूह महिलाआंे द्वारा संचालित हैं, इनके तहत 348 गांवों की 31 हजार 200 महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं। राज्य सरकार के राजीविका विभाग द्वारा समूह स्थापित होते ही समूह का बैंक मंे खाता खुलवाया जाता है, इससे नियमित रूप से मासिक बचत राशि को बैंक में जमा करवाने की आदत भी महिलाओं को हो रही है। नियमित बचत, समूह से लिये गये ऋण का समय पर चुकारा तथा समूह की खाता-बही के उचित लेखन के कारण बैकांे द्वारा भी इन समूहों को आसानी से ऋण दिया जा रहा है, इसके एवज में वे कोई गारन्टी की मांग भी नहीं करते हैं। बैंक इनका ऋण सुरक्षित मान रहे हैं क्यांेकि राजीविका के 690 स्वयं सहायता समूहों को अब तक दिये गये 5.15 करोड़ रुपये के ऋण मंे से एक भी समूह का ऋण डूबा नहीं है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक समूह को 65 हजार रुपये की राशि दो किस्तांे मंे दी जाती है। प्रथम किस्त 15 हजार रूपये अनुदान राशि व दूसरी किस्त आजीविका सवंर्धन हेतु 50 हजार रूपए ऋण-राशि प्रदान की जा रही है। इस प्रकार जिले में अब तक 15.5 करोड़ रूपये की सहायता समूहों को दी जा चुकी है। महिलाआंे द्वारा की गई बचत राशि को उक्त सहायता राशि में मिलाकर, एकत्रित धन को आपस मंे बांट लिया जाता है। वे पहले अपने पूर्व में लिये गये कर्ज को चुकाती हैं, फिर स्वयं की आजीविका हेतु छोटी दुकान, डेयरी, लेडीज टेलरिंग, बड़ी-पापड़-अचार के कुटीर उद्योग इत्यादि लगा रही हैं।
स्वयं सहायता समूह के सदस्यों तथा उनके परिवार के युवाओं को कौशल विकास एवं स्वरोजगार हेतु राजीविका द्वारा प्रशिक्षण भी प्रदान किये जा रहे हैं। इन रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षणों से न केवल उनकी क्षमताओं का विकास होता है बल्कि सिलाई-बुनाई, नर्सिग, ब्यूटी पार्लर, टेली-एकाउन्टेन्सी, इलेक्ट्रीशियन, रिटेल सेल्समेन इत्यादि प्रशिक्षणों से वे रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। कौशल आजीविका विकास केन्द्र एवं रूडसेटी के माध्यम से अब तक 710 महिलाओं एवं युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
–शरद केवलिया
सहायक जनसम्पर्क अधिकारी, बीकानेर

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पर्यटन विभाग द्वारा विचार संगोष्ठी का आयोजन शुक्रवार को
बीकानेर, 17 मई। जयपुर में 20-22 जुलाई तक आयोजित होने वाले राजस्थान डोमेस्टिक ट्रेवल मार्ट (त्ज्क्ड.2018) के प्रचार-प्रसार के मद््देनजर शुक्रवार को होटल राजविलास में पर्यटन विभाग और एफ.एच.टी.आर द्वारा प्रातः 11 बजे से एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।
विभाग के सहायक निदेशक कृष्ण कुमार ने बताया कि स्थानीय पर्यटकों के लिए राजस्थान पर्यटन विभाग और फेडरेशन ऑफ हॉस्पिटेलिटी एण्ड टूरिज्म इन राजस्थान के संयुक्त तत्वाधान में 20-22 जुलाई तक राजस्थान डोमेस्टिक ट्रेवल मार्ट (त्ज्क्ड.2018) का आयोजन जयपुर में किया जाएगा। यह मार्ट स्थानीय होटल, रिसोर्ट, हैरिटेज होटल व्यवसायियों के लिए देश भर से आए निवेशकों के समक्ष अपने होटल को प्रदर्शित करने के साथ-साथ ही बी2बी बैठकों के द्वारा सहयोग करने का अवसर भी प्रदान करेगा। साथ ही मार्ट में पर्यटन के क्षेत्रा में आ रहे नवीनतम परिवर्तनों, पर्यटकों के रूझानों एवं अन्य नवीन विधाओं के बारे में जानकारियां प्राप्त हो सकंेगी। मार्ट में ट्रेवल, ट्रेड और पर्यटन उद्योग से जुड़े हुए लगभग 200 निवेशक भाग लेंगे।
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उच्चरक्तचाप दिवस पर संवाद आयोजित
बीकानेर, 17 मई। पीबीएम अस्पताल के मेडिसिन विभाग के न्यू ओपीडी ब्लॉक मंे गुरूवार को विश्व उच्चरक्तचाप दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्रचार्य एवं नियंत्राक (कार्यवाहक) एवं विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग डॉ. लियाकत अली गौरी थे। गौरी ने बताया कि मेडिसिन विभाग विभिन्न बीमारियों पर आधारित अन्तराष्ट्रीय दिवस नियमित रूप से मनाता है जिससे आमजन में इनके प्रति जागरूकता आए तथा वे इन बीमारियों के लक्षण, उपचार व बचाव प्रति जागरूक हो सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान जीवन शैली से उच्चरक्तचाप की समस्या बढ़ रही है। मरीज को लगातार बी.पी चैक करवाते रहना चाहिए। अगर बी.पी के इलाज में लापरवाही की जाए तो गुरदे की खराबी, हद्रयघात, लकवे की बीमारी हो सकती है। गौरी ने धुम्रपान, मोटापा व तनाव से दूर रहने व अच्छी नींद लेने व व्यायाम करने की सलाह दी। डॉ. गौरी ने बताया की मेडिसिन विभाग के नये ओपीडी ब्लॉक में जल्दी ही समान्य बीमारियों के पोस्टर लगाए जाएंगे, जिससे आमजन को इनके बारे में सचित्रा जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
इस अवसर पर पी.बी.एम अस्पताल के अधीक्षक डॉ पी.के. बेरवाल, अतिरिक्त प्रधानाचार्य द्वितीय डॉ. रंजन माथुर, डॉ. बी.के गुप्ता, डॉ. कुलदीप सैनी, डॉ. मनोज मीणा सहित अन्य डॉक्टरों ने उच्चरक्तचाप के बारे में जानकारी दी व उपस्थित लोगों के सवालों के जबाब दिए।

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