
बीकानेर 20 मई । कादम्बिनी क्लब द्वारा आयोजित साझा काव्य संकलन ‘काव्यसुधा’ का आज लोकार्पण किया गया । समारोह की अध्यक्षता में बोलते हुए राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार शिवराज छंगाणी ने कहा कि आज का दिन महोत्सव का दिन है जिसमें 26 रचनाकारों में तीन पीढियों का सृजन एक साथ सामने लाया गया है । यह काव्य संग्रह नए लेखकों को रोशनी प्रदान करता है । नई कविता में लयात्मकता का होना आवश्यक है । साझा काव्य संग्रह पर पत्र वाचन करते हुए कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि यह साझा काव्य संग्रह अच्छा लिखने की प्रेरणा देता है । इसके प्रकाशन से नऐ सृजन करने वालों को मंच मिला है । मुख्य अतिथि कवि-कथाकार कमल रंगा ने कहा कि सुमित्रनन्दन पंत के जन्म दिन पर आयोजित यह कार्यक्रम अपने आपमें एक नई उर्जा है । रचना में शब्द जितने गम्भीर होते हैं उतनी ही गम्भीर रचना होती है । आज के समय में कविता नहीं बल्कि कविता की भीड बहुत ज्यादा है जिसमें यह साझा काव्य संग्रह अपना स्थान बनाता है । विशिष्ठ अतिथि पत्रकार लूणकरण छाजेड ने कहा कि सृजन में विधा कोई मायने नहीं रखती अच्छा लिखने के लिए अच्छा पढना जरुरी होता है । विशिष्ठ अतिथि साहित्यकार मदन सैनी ने कहा कि लेखक को लेखन से पहले भाषा पर अधिकार करना चाहिए । वर्तनी में अशुद्धियां नहीं होनी चाहिए । व्याकरण का विशेष ध्यान रखना चाहिए । इन सब का ध्यान रखने से सृजन उत्कृष्ट श्रेणी का होता है । साझा काव्य संग्रह में सम्मिलित 26 रचनाकारों का सम्मान पट्टिका एवं स्मृतिचिंह देकर सम्मान किया गया । क्लब के द्स सदस्यों राजाराम स्वर्णकार, डॉ.रेणुका व्यास, डॉ.सुधा आचार्य, डॉ.जियाउलहसन कादरी, डॉ.मंजू कच्छावा, डॉ.नगेन्द्रनारायन किराडू, डॉ.रुचिरा भार्गव, डॉ.संजू श्रीमाली, डॉ.कृष्णा आचार्य, और डॉ.अजय जोशी की पुस्तकों का प्रकाशन इस वर्ष हुआ इनका भी सम्मान पट्टिका एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मान किया गया । इससे पहले मंच ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजली कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया । स्वागत उद्बोधन देते हुए इंजीनियर गिरिराज पारीक ने साझा काव्य संग्रह पर विस्तार से चर्चा की । समनवयक नरसिंह बिन्नानी ने क्लब की गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया । काव्य संग्रह की सम्पादक डॉ. कृष्णा आचार्य ने संग्रह में प्रकाशित रचनाओं के संग्रहण के बारे में बताया । संयोजक अजय जोशी ने क्लब की गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया । कार्यक्रम के साक्षी बने- पी.सी तातेड, पत्रकार मधु आचार्य, व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा, उषाकिरण सोनी, एन.डी. रंगा, हनुमान कच्छावा, संगीता व्यास, माधुरी पारीक, चन्द्रशेखर जोशी, डॉ.एम.एल व्यास, कांता चाढा, इंजी.निर्मल शर्मा, मोनिका शर्मा, अल्पना हर्ष, बाबुलाल छंगाणी, बुलाकीदास हर्ष, इन्द्रा व्यास, कासिम, नरसिंह भाटी, पुखराज सोलंकी, सरोज भाटी, शेलेन्द्र सरस्वती आदि । आभार कवि-कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने ज्ञापित किया । संचालन डॉ. पंकज जोशी ने व्यक्त किया । संवाद प्रेषक राजाराम स्वर्णकार