जनकवि हरीश भादानी को नमन किया अवरेख कार्यक्रम में

रेत में नहाकर कल को बुलाने वाले हरीश भादानी मतलब मजलूम मजदूर मजबूर की आवाज

बीकानेर 11 जून 2018। जनकवि हरीश भादानी न केवल रचनाकार थे बल्कि वे छात्र जीवन में छात्र नेता और उसके बाद मजलूम मजदूर मजबूर की आवाज उठाने वाले आंदोलन के अग्रणीय भी रहे। उन्होंने 80 के दशक में राजस्थानी भाषा साहित्य संस्कृति अकादमी को बीकानेर से स्थानांतरित होने से रोकने के लिए आत्मदाह की चेतावनी दी थी। हरीश भादानी को जन आंदोलन के तहत गिरफ्तारी से बचाने के लिए नंदकिशोर आचार्य सहित नगर के प्रबुद्ध जनों ने उन्हें एक शादी समारोह में से मकानों की छतों पर से लंघवा कर उनको भूमिगत किया था । इस तरह के और भी संस्मरण वरिष्ठ कवि संपादक साहित्यकार भवानी शंकर व्यास विनोद ने साझा किए। यह अवसर उपलब्ध करवाया प्रज्ञालय संस्थान एवं राजस्थानी युवा लेखक संघ ने 11 जून 2018 को नागरी भंडार कला दीर्घा में । दो दिवसीय अवरेख के पहले दिन नगर के संस्कृति कर्मियों और रचनाधर्मी वर्ग के प्रतिनिधियों ने ख़्यातनाम गीतकार एवं जनकवि हरीश भादाणी को नमन करते हुए उनके जन्मदिवस पर भादाणी की रचनाओं का हिंदी राजस्थानी अंग्रेजी संस्कृत पंजाबी आदि 7 भाषाओं में अनुवाद का रसास्वादन किया। आयोजकों व अतिथियों ने भादाणी की दोहित्री रितु व्यास का सम्मान किया। वक्ताओं ने भादाणी की सृजन-यात्रा को रेखांकित करते हुए उनकी कृतियों और उनके जन जन की जुबान पर चढ़े गीतो में प्रयुक्त प्रादेशिक स्थानीय बोली के शब्दों के समावेश के बारे में बताया और कहा कि वे आम जन के मन की बात अपने गीतों में उकेरते थे। उनकी मैंने नहीं कल ने बुलाया है… रेत में नहाया है मन… और ऐसी अनेक रचनाएं आज भी नगर के युवा कार्यक्रमों में गाकर भादाणी को नमन करते हैं। आगंतुकों का स्वागत डॉक्टर अजय जोशी ने किया। आरंभ में कमल रंगा ने भादाणी के गीत एवं नवगीत के संदर्भ में आलोचनात्मक पत्र का वाचन किया। उनके लोकप्रिय गीत एवं नवगीत की प्रस्तुति आनंद वी. आचार्य, अविनाश व्यास, निर्मल शर्मा ने दी।
इस कार्यक्रम में हरीश भादाणी की रचनाओं का सात भारतीय भाषाओं में अनुवाद का वाचन गिरधर रत्नू, ज़ाकिर अदीब ,डॉ. चंचला पाठक, इला पारीक, पुखराज सोलंकी, बी.डी. हर्ष एवं गिरिराज पारीक ने किया। मधु आचार्य आशावादी ने भादाणी के साहित्य और जन आंदोलन से भरी जीवनी को एक खुली किताब बताया। कार्यक्रम में भादाणी के साथ वातायन और अनेक साहित्यिक गतिविधियों में शामिल रहे सरल विशारद सहित नगर के संस्कृतिकर्मी और रचनाधर्मी बड़ी संख्या में मौजूद थे।
. ✍️ मोहन थानवी

Leave a Comment