नागदा को साहित्यश्री, करमचंदाणी को हिन्दी साहित्य सृजन पुरस्कार

मंंगत बादल राजस्थानी व सुमित शर्मा को युवा साहित्य पुरस्कार
श्रीडूंगरगढ़. यहां की साहित्यिक संस्था राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से शुक्रवार को साहित्यकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इसमें संस्था की सर्वोच्च उपाधि साहित्यश्री एवं डॉ. नन्दलाल महर्षि हिन्दी, पं.मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी साहित्य सृजन व बृजरानी भार्गव युवा साहित्य पुरस्कार से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर साम्प्रदायिक समरसता और हिन्दी विषय पर संगोष्ठी भी हुई।
संस्कृति भवन के सभागार में हुए इस समारोह में मुख्य अतिथि प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक श्यामसिंह राजपुरोहित ने कहा कि साहित्यकार समाज को दर्पण दिखाता है। भाषा का साम्प्रदायिकता से कोई लेना देना नहीं है। जो साम्प्रदायिक होगा वो समरस नहीं होगा। हमारी भाषा हिन्दी सभी तरह की समरसता से ओतप्रोत है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए भाईचारा फाउण्डेशन जयपुर के वेद व्यास ने कहा कि जब तक लेखक के विचार व शब्दों में दृढ़ता नहीं होगी तब तक वह कोई रास्ता नहीं बना पाएगा। लेखक वैचारिक आधार के बिना कालजयी रचना का निर्माण नहीं कर सकता। साहित्य मनोरंजन व स्वान्त सुखाय का साधन नहीं है, बल्कि साहित्य का उद्देश्य होना चाहिए। विशिष्ट अतिथि जयपुर के डॉ. चन्द्रभान भारद्वाज ने कहा कि भाषा में सामुदायिकता नहीं होती है। आदमी को संस्कारित करने में भाषा ने महान योगदान दिया है। समाज में समरसता स्थापित करने में तुलसीदास, सुरदास, रसखान आदि ने महान कार्य किए है।
साहित्यश्री से पुरस्कृत डॉ. माधव नागदा ने बताया कि साहित्य जोडऩे का काम करता है। जो रचना तोडऩे का काम करे वह साहित्य नहीं है। पुरस्कार अलंकार प्राप्त करना मेरे लिए गर्व की बात है। हिन्दी सृजन से पुरस्कृत हरीश करमचन्दानी ने कहा कि बाजारवाद के समय में यह संस्था साहित्य व हिन्दी भाषा का प्रचार प्रसार समूचे भारत में कर रही है। इस अवसर पर डॉ. मंगत बादल ने बताया कि अन्याय के प्रतिरोध के लिए कलम ही एक माध्यम बचा है। निकला गया शब्द चाहे वह जबान से हो चाहे किताब से अपने लक्ष्य तक अवश्य ही पहुंचेगा। डॉ. अनुश्री राठौड़, जाकिर आदीब ने भी सम्बोधित किया।
समाजसेवी शिवप्रसाद सिखवाल व लायन महावीर माली ने कहा कि आज विदेशी नागरिक भी हिन्दी भाषा को अपना रहे है। यह हमारे देश के लिए सुखद अनुभव है। संस्था के अध्यक्ष श्याम महर्षि ने भाषा के विकास में संस्थागत एवं जन सहयोग की हिमायत करते हुए भाषायी विकास की बात कही। युवा साहित्यकार रवि पुरोहित ने कहा कि यदि कोई साहित्यकार किसी सामाजिक विद्रुप या मू्रल्यगत विचलन के विरूद्ध आवाज नहीं उठाए तो यह सांस्कृतिक हमले का ही प्रतिरूप है। संस्था के मंत्री बजरंग शर्मा ने आभार जतायाा। इस दौरान डॉ. चेतन स्वामी, एडवोकेट शोभाचन्द आसोपा, कोषाध्यक्ष रामचन्द्र राठी, डॉ. महावीर पंवार, सत्यदीप, डॉ. मदन सैनी, तुरजमल बोधीजा, भंवरलाल भोजक, श्रीभगवान सैनी, रेवन्त मल नैण, दयाशंकर शर्मा सहित कई विद्वजन उपस्थित थे।
नागदा को ‘साहित्यश्रीÓ एवं हरीश करमचंदाणी, मंगत बादल, सुमित शर्मा को साहित्य सृजन पुरस्कार
लालमादड़ी के कथाकार व समालोचक माधव नागदा को सामाजिक सराकारों के लिए मल्लाराम माली की स्मृति में दी जाने वाली संस्था की सर्वोच्च उपाधि साहित्यश्री से अलंकृत किया गया। इसी प्रकार डॉ. नन्दलाल महर्षि स्मृति हिन्दी सृजन पुरस्कार जयपुर के हरीश करमचंदाणी, पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार रायसिंहनगर के मंगत बादल व बृजरानी भार्गव स्मृति युवा साहित्य पुरस्कार बीकानेर के सुमित शर्मा को दिया गया। यह पुरस्कार प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक श्यामसिंह राजपुरोहित, संस्था अध्यक्ष श्याम महर्षि, मंत्री बजरंग शर्मा, प्रो. भंवर भादाणी, वेद व्यास, डॉ. चन्द्रभान भारद्वाज, शिवप्रसाद सिखवाल, महावीर माली ने प्रदान किया। इस सम्मान स्वरूप ग्यारह-ग्यारह हजार रुपए व युवा पुरस्कार इक्यावन सौ रूपए, प्रशस्ति पत्र, शॉल एवं प्रतीक चिह्न दिया गया।
कहानी प्रतियोगिता सम्मान
इस समारोह में संस्था की ओर से बख्तावर सिंह राजपुरोहित राजस्थानी कहानी प्रतियोगिता में प्रथम रही डॉ. अनुश्री राठौड़, द्वितीय सन्तोष चौधरी, तृतीय राजेन्द्र शर्मा मुसाफिर को पुरस्कृत किया गया। इसके अलावा वाजिद हसन काजी, मनोज कुमार स्वामी, किशोर कुमार निर्वाण, विमला नागला व सुनील कुमार गज्जाणी को सान्तवना पुरस्कार दिया गया।

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