कविता व्यक्ति के पांडित्य का के प्रदर्शन का माध्यम नही बल्कि जीवन दर्शन है। कविता में भावों और संवेदनाओं का होना ही उसको सही रूप में कविता बनाता है यदि कविता में संजीदगी नही है तो वह कविता भी नही है। ये विचार कादम्बिनी क्लब और नवकिरण सृजन मंच के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय होटल मरुधर हेरिटेज के विनायक सभागार में आयोजित कविता पाठ और कविता पर चर्चा कार्यक्रम में कवयित्री और समीक्षक डॉ. रेणुका व्यास ‘नीलम’ ने व्यक्त किये। इस अवसर पर उन्होंने अपनी कविता ‘आओ मेघा आओ..’ भी प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के प्रारंभ में विषय प्रवर्तन करते हुए क्लब के संयोजक डॉ अजय जोशी ने कहा कि आज की कविता बहुआयामी है। यह नित नए स्वरूप में आ रही है कविता में बहुत से प्रयोग भी चल रहे हैं।कविता में गेयता और सम्प्रेषणीयता ही उसे पाठकों और श्रोताओं के बीच लोकप्रिय बनाती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सेसोमू कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नरसिंह बिन्नानी ने कविता को व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के जुड़ाव का माध्यम बताया।उन्होंने कहा कविता सामजिक परिवेश से उत्पन्न होती है। इस आयोजन में कवि कथाकार श्री राजाराम स्वर्णकार ने दर्द कागज पर मेरा दिखता गया..,शब्दों की पूजा करता हूँ…जैसी कविताओं के साथ अपनी प्रभावी प्रस्तुति दी।युवा शायर असद अली असद ने अपनी ग़ज़ल कब तक दिलों से दूर…प्रस्तुत की. शिक्षविद मोहनलाल जांगिड़ ने खाली पेट नकली दूध नकली दवाई… जैसी सामयिक और मार्मिक कविता प्रस्तुत की। कवि माणक चंद सुथार ने रेत की आंधी…, गिरिराज पारीक ने यात्रा थीम पर हिंदी और राजस्थानी में अपनी कविताएं प्रस्तुत की। इस कार्यक्रम व्यवसायी हेमचंद बांठिया,डॉ रुचिरा भार्गव, राहुल आचार्य सहित कई गणमान्य नागगरिकों और साहित्यकारों ने विचार विमर्श में सहभगिता की और अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन क्लब के संयोजक डॉ. अजय जोशी ने किया और आभार ज्ञापन माणक चंद सुथार ने किया।
डॉ अजय जोशी
संयोजक