घर में लगी आग में जल गए थे इलाज वास्ते लिए उधारी के 1 लाख रूपए
बीकानेर, 30 अगस्त। 4 साल के मासूम रामकिशन को नई जिन्दगी मुबारक। झझू के ईंट भट्टा मजदूर पत्ताराम के लिए भी इससे ज्यादा खुशी क्या होेगी कि बेटा अब खतरे से बाहर है और खुलकर सांस ले सकता है। जयपुर के नारायणा हृदयालय में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत रामकिशन की हार्ट सर्जरी हुई है वो भी बिलकुल निःशुल्क।
रामकिशन को जन्मजात दिल में छेद की समस्या थी। कोढ़ में खाज ही हो गई, जब घर में आग लग गई। अन्य सामान के साथ दादा पेमाराम द्वारा भट्टा मालिक से इलाज के लिए उधार लिए 1 लाख रूपए भी जल गए। लेकिन कहते हैं ना कि जाको राखे साईंया मार सके ना कोय। किस्मत ने पलटा खाया और जब अखबार में छपी इस खबर पर जिला कलेक्टर कुमार पाल गौतम की नजर पड़ गई। उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए सीएमएचओ को किसी भी तरह रामकिशन का निःशुल्क इलाज कराने का जिम्मा सौंप दिया। आरबीएसके के नोडल आरसीएचओ डॉ रमेश गुप्ता तथा टीम आरबीएसके में शामिल एडीएनओ डॉ मनुश्री सिंह, डीइआईसी मेनेजर योगेश पंवार व आरबीएसके कोलायत द्वारा इसे मिशन की तरह लेते हुए रामकिशन के केस को आगे बढ़ाया गया। उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी द्वारा भी इसका संज्ञान लिया गया और जयपुर तक प्रयास किए गए। परिणामस्वरूप 26 अगस्त को रामकिशन की हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक हो गई। आरबीएसके योजना ना होती तो इस इलाज में ढाई से तीन लाख का खर्च लगता जो गरीब परिवार के लिए संभव ना था।
क्या है आरबीएसके ?
प्रत्येक बच्चे को स्वास्थ्य सुरक्षा व उसके समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिये राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है, जिसमें जन्म से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण सभी सरकारी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केन्द्रों व मदरसों पर समर्पित मोबाईल हैल्थ टीम के द्वारा किया जाता है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत जन्म से 18 वर्ष तक की उम्र के बच्चों में जन्मजात विकार, पोषक तत्वों विटामिन की कमी से होने वाले विकार, गंभीर बीमारी की पहचान करना, शारीरिक विकास में कमी व शारीरिक अयोग्यता आदि चिन्हित 38 बीमारियांे को मोबाईल हैल्थ टीम द्वारा संस्थानों से चिन्हित कर उच्च संस्थानों पर रेफर कर उन बच्चों को उपचारित करवाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत स्क्रीनिंग हेतु बीकानेर जिले में कुल 6 ब्लाॅक व 1 शहरी क्षेत्र में 14 मोबाईल हैल्थ टीम कार्यरत है। मोबाईल हैल्थ टीम द्वारा प्रत्येक वर्ष स्कूल, आंगनबाड़ी एवं डिलेवरी पाॅईन्ट पर जन्मे जन्म विकृति से ग्रसित बच्चों की स्क्रीनिंग की जा रही है। आरबीएसके के तहत प्रत्येक संभाग मे एक मोर्बाइल डेन्टल वेन द्वारा शिविर लगाए जा रहे हैं।
बच्चों का इलाज मेडिकल काॅलेज, डीईआईसी सेन्टर, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र स्तर पर व केम्पों में किया जाता है। जिन बच्चों के ईलाज की सुविधा जिले में उपलब्ध नहीं है, उनका इलाज राज्य सरकार द्वारा एमपेनलड निजी चिकित्सालय में भी करवाया जाता है। जिले में अब तक 92 बच्चों के हृदय रोग के तथा 89 क्लब फुट, कटे हाॅट व तालु, न्यूरल टयूब डिफेक्ट, काॅन्जिनाॅईटल केटरेक्ट व अन्य बीमारी के आॅपरेशन करवाए गए हैं।