भारत माला जैसा महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट पेटी कॉन्टेक्ट पर नोसिखिया ठेकेदारों के हवाले

चन्दन सिंह भाटी
जेसलमेर सामरिक महत्व के महत्वकांक्षी भारत माला प्रोजेक्ट के तहत बाडमेर जिले के बाखासर से लेकर श्री गंगानगर तक करीब 1300 किलोमीटर सरहदी सड़के उच्च गुणवत्ता की बनाने के लिए केंद्र सरकार ने सपना देखा।करीब 1200 करोड़ रुपये बाडमेर जेसलमेर में इन सड़कों पर खर्च होने है।।प्रोजेक्ट का द्वितीय चरण आरम्भ होने को हे मगर सब लेट स्थानीय ठेकेदार सार्वजनिक निर्माण विभाग की तर्ज पर इन महत्वकांक्षी सड़को को बना रहे।जिन ठेकेदारों को काम मिला उनमें कई भरस्टाचार के सरताज है।।जिनके खिलाफ उच्च स्तर पर जांचे चल रही है। मुनाबाव से जेसलमेर लोंगोवाल तक कि सड़कों के निर्माण में उपयोग की जा रही घटिया क्वालिटी की निर्माण सामग्री सारे प्रोजेक्ट पर पानी फेर रही है।।इन सड़कों को नियमानुसार दस से तरह मीटर चौड़ी बनाई जानी थी ताकि आपात स्थति में सेना और वायुसेना इन सड़कों का उपयोग रनवे के रूप में भी कर सके मगर ठेकेदारों द्वारा ग्रेवल की जगह बालू रेत मिलाकर कार्य निपटाया जा रहा है।।सूत्रों के सनुसार इन सड़कों के निर्माण में गिट्टी का उयोग नही कर स्थानीय क्रेसरों से निम्न क्वालिटी के मूंगिया इस्तेमाल कर रहे जबकि इस प्रोजेक्ट की सड़कों के लिए गिट्टी की साइज निर्धारित है।लोंगोवाला में चल रहे कार्य की एक बारगी उच्च स्तरीय गुणवत्ता की जेन्च कर दी जाए तो ठेकेदारों और प्रोजेक्ट मैनेजरों की मिली भगत सामने आ जाये।।उल्लेखनीय है भारत माला प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। जिस पर लाखों करोड़ रुपये खर्च करने है ताकि जनता और सेना को उच्च गुणवत्ता की सड़कें परिवहन के लिए मिल सके।अलबत्ता जेसलमेर बाडमेर जिलो में भारत माला प्रोजेक्ट की सड़कों में जम कर घपलेबाजी हो रही है।। पश्चिमी राजस्थान के चार सरहदी जिलो में सड़कों को उच्चतम गुणवत्ता के निर्माण के लिए चल रहे भारत माला प्रोजेक्ट की जगह जगज भद्द पिट रही है।।भारत माला प्रोजेक्ट में भरष्टाचार की खबरों की गूंज राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और परिवहन विभाग तक पहुंच गई।।बाखासर से आरंभ हुई भारत माला की सड़कों के निर्माण में पहले पायदान पर ही अनियमितता बरती गई।इस प्रोजेक्ट का मूल ठेकेदार कौन है किसी को पता नही।मूल ठेकेदार ने नियम विरुद्ध कार्य सबलेट किया।।सबलेट ठेकेदारों ने पेटी कॉन्टेक्ट के जरिये छोटे छोटे ब्लॉक नोसिखिये ठेकेदारों को दे दिए।जबकि भारत माला की गाइड लाइन में निविदा में मुख्य शर्त थी कि कार्य आगे सबलेट नहीं किया जाएगा।ऐसा होता है तो निविदा निरस्त की जा सकती है।अलबत्ता गुणवत्ता कार्य करवाने के लिए भारत माला प्रोजेक्ट के जगह जगह जिलो में कार्यालय खोले गए है।मगर इन कार्यालयों में कोई हलचल दिखाई नही देती।।साइट पर चल रहे कार्य के निरीक्षण समय समय पर करने की बजाय शहरी क्षेत्र में गाड़ी घोड़े दौड़ाए जा रहे है। सूत्रानुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को शुरू से ही ग्रहत लगा है।।किसी भी क्षेत्र में गुणवत्ता का कार्य नही हो रहा।।इसका मुख्य कारण पेटी कॉन्टेक्ट पे कार्य कर रहे अनाधिकृत ठेकेदार है जिन्होंने कभी पी डब्यू डी की सड़कें नही बनाई उन्हें भारत माला जैसे महत्वपूर्ण सड़को का कार्य आवंटन कर दिया ।जिसके चलते सड़को के निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।।मौके पर जाकर सक्षम अधिकारी सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी देखे तो सारा माजरा समझ आ जायेगा।।भारत माला प्रोजेक्ट छोटे छोटे ठेकेदारों के पनपने में जरूर सहायक सिद्ध हो रही। जेसलमेर बॉर्डर पर चल रहे कार्यो में जमकर भरष्टाचार हो रहा। मोदी सरकार लाख भरष्टाचार रोकने की बात कहै मगर यह जेसलमेर बाडमेर के ठेकेदारों पर लागू नही होती।।यहां तक कि ठेकेदारों के पास साइट प्लान तक उपलब्ध नही है।।इस सन्दर्भ परियोजना अधिकारी प्रशांत गुप्ता से बात करनी चाही उनका मोबाइल स्विच ऑफ़ आया ,कार्यालय में मिले नहीं ,

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