खौफ के साये में दरबदर भटक रहे सत्ताईस परिवारों की घर वापसी करा रहनुमा बने पुलिस कप्तान डॉ अजय सिंह

चंदन सिंह भाटी
जैसलमेर आपसी रंजिस की वजह से अपना गांव ,घर ,खेत खलिहान छोड़ परिवार के
साथ पांच साल तक खानाबदोश की जिन्दगि जीने वाले लोगो को अचानक कोई मिल
जाये जो उन्हें पुनः गांव में सुरक्षा की गारंटी के साथ बसा दे वो भी एक
दो नही पूरे सत्ताईस परिवारों को तो इन परिवारों के लिए वह व्यक्ति
रहनुमा से कम नही। ऐसा ही कुछ कर दिखाया जैसलमेर के टाइगर डॉ अजय सिंह
ने।।

बहुत दर्दनाक कहानी है इन 27 सोढा राजपूत परिवारों की

जेसलमेर के सरहदी खुहड़ी थाना क्षेत्र का छोटा सा मगर लोक कलाकारों की खान
काहे जाने वाले इस गांव में कोई 2018 में सोलर एनर्जी कम्पनी में वाहन
लगाने के मामले में दो गुटों में खूनी संघर्ष हुआ।जिसमे एक व्यक्ति की
मौत हो गई थी , बलवानों ने कमजोरों पर ज़ोराज़माइस कर उन्हें लहू लुहान कर
दिया कच्चे आशियाने जलाकर राख कर दिए।खेत खलिहान नष्ट कर दिए। सोढा
राजपूत जाति के सत्ताईस परिवारों का जीना दुर्भर कर दिया।।न्याय और इंसाफ
के लिए दर दर की ठोकरें खाई। इस आस के साथ कि कही से न्याय के साथ
सुरक्षा मिल जाएगी , पल पल इन सत्ताईस परिवारों के सिर पर मौत मंडरा
रही थी। ये परिवार ख़ौफ़ के साये में पल पल घुटकर जी रहे थे।असुरक्षित ये
सत्ताईस परिवार अनदेखे मौत के ख़ौफ़ से हार गए। सामाजिक निर्णय लिया
पुश्तेनी गांव को छोड़कर परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसा ले ,अपना सब
कुछ छोड़ आंसुओ से भरी आंखों से पलायन कर गए।सभी सत्ताइस परिवार जैसलमेर
शहर की कच्ची बस्तिओं में जानकारों के वहां आश्रय लेकर रह रहे थे , ।मगर
इन्हें कहीं चैन से रहने नहीं दिया।एक गांव से दूसरे गांव पिछले पांच
सालों से दर बदर ठोकरें खाते रहे।मगर इन्हें कही बाहुबलियों ने बसने नही
दिया।इसी बीच इन परिवारों ने स्थानीय पुलिस से कई मर्तबा सुरक्षा की
गुहार की ,मगर पुलिस ने भी किसी अनजाने हादसे की आशंका के चलते कोई मदद
नहीं की ।खानाबदोश की जिंदगी जीने लगे ,
आखिरकार एक बार फिर पुलिस की शरण मे आये।पुलिस के कप्तान डॉ अजय सिंह के
बारे में इन परिवारों ने कहीं से सुना था दबंग और तेज़ तर्रार एस पी है
तो न्याय और सुरक्षा की आस के साथ अजय सिंह से मिलकर भावनाओ में बह हकीकत
बयान की।अजय सिंह भावुक हो गए।मगर दृढ़ निश्चय कर लिया।इनकी पुश्तेनी घर
वापसी जरूर होगी।अजय सिंह मजबूती के साथ इन परिवारों के साथ न्याय के लिए
खड़े रहे , इनकी घर वापसी तय कराई , खुहड़ी थाना के अधिकारी से चर्चा कर इन
सत्ताइस परिवारों को सुरक्षा के साथ पुनः बरना गांव लाये और इन्हें न
केवल पुनः बसाया इनकी भरपूर मदद कर इन्हें आर्थिक रूप से सम्बल बनाने के
प्रयास किये।पुलिस अधीक्षक डॉ अजय सिंह ने इन परिवारों की सुरक्षा
सुनिश्चित कर एक मुख्य आरक्षी के नेतृत्व में आठ पुलिस के जवानो के साथ
इन्हे पुनः पुश्तैनी घरों में बसाया ,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राकेश बैरवा
की देखरेख में इन्हे गांव लेजाकर पुनः बसाया ,अभी इन परिवारों को सुरक्षा
के लिए पुलिस बलतैनात हैं ,मुख्य आरक्षी बाबू सिंह और आठ जवान नियुक्त
हैं ,अलबत्ता पुलिस दोनों पक्षौं में समझाई में जुटी हैं ,पुराणी बाते
भूल कर एक दूसरे का सहयोग कर गांव में अमन के साथ रहे ,

चार साल से खुद के आसियाने छूटे हुए थे ,सक्षम होते हुए भी खानाबदोश की
जिंदगी जीने को मजबूर थे ,पुलिस अधीक्षक डॉ अजय सिंह हमारे परिवारों के
लिए रहनुमा बन कर आये ,हमे अपने पुश्तैनी गांव में पुनः बसाया ,हम अपने
घरो में वापस आकर बहुत खुश हैं ,अजय सिंह के हम ऋणी हैं ,हमारी पुकार
सुनी ,न्याय दिया ,अर्जुन सिंह सोढा

इन सत्ताईस परिवारों ने पुश्तैनी गांव में पुनः बसने की इच्छा जताई थी
,हमने इन्हे पूर्ण सुरक्षा के साथ इनकी घर वापसी सुनिश्चित कर अपना
दायित्व निभाया ,इन परिवारों की सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया हैं
,हमारा प्रयास हे दोनों पक्षों में सुलह हो ताकि गांव में अमन चैन का
माहौल हो ,सब अपनी जिंदगी ख़ुशी के साथ जिए ,डॉ अजय सिंह राठोड पुलिस
अधीक्षक जैसलमेर

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