जयपुर, मई, 2026- जयपुर: जयपुर में तंबाकू सेवन की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है, जो राजस्थान के व्यापक परिदृश्य को दर्शाती है। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के अनुसार, राजस्थान उन राज्यों में शामिल है, जहाँ तंबाकू सेवन की दर देश में सबसे अधिक है। राज्य में एक-तिहाई से अधिक वयस्क किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं, जिनमें सिगरेट, बीड़ी और धुआंरहित तंबाकू उत्पाद शामिल हैं।
यह चिंता केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम के तहत कार्रवाई के आंकड़े लगातार यह संकेत देते हैं कि शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास तंबाकू बिक्री पर अब भी प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता है। हाल के राज्यस्तरीय अभियान में हर साल हजारों उल्लंघन दर्ज किए गए हैं, जो खासकर युवाओं के लिए तंबाकू उत्पादों की आसान उपलब्धता को उजागर करते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, भारत में हर वर्ष 13 लाख से अधिक मौतें तंबाकू सेवन के कारण होती हैं, और यही वजह है कि इसे समय से रोकी जा सकने वाली मौतों का एक बड़ा कारण माना जाता है। हालांकि धूम्रपान के नुकसान को लेकर जागरूकता बढ़ी है, लेकिन इसे छोड़ना अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, जयपुर की साइको-ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. प्रियसी सुरोलिया ने कहा, “कई लोग सचमुच धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं, लेकिन निकोटिन की लत मानसिक और शारीरिक, दोनों स्तरों पर असर डालती है, इसलिए यह आसान नहीं होता। निकोटिन धीरे-धीरे मस्तिष्क के रिवॉर्ड सिस्टम पर प्रभाव डालता है और निर्भरता पैदा करता है। यही कारण है कि बिना किसी सहायता के अचानक धूम्रपान छोड़ने की कोशिश करने पर लोग दोबारा इसकी ओर लौट जाते हैं।” इस वर्ष वर्ल्ड नो टोबैको डे की थीम, “अनमास्किंग द अपील : काउंटरिंग निकोटिन एडिक्शन”, निकोटिन की लत को बेहतर ढंग से समझने पर केंद्रित है। इसी के साथ विशेषज्ञ धूम्रपान छोड़ने को लेकर अधिक संतुलित और व्यावहारिक चर्चा की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
डॉ. सुरोलिया ने आगे कहा, “लोगों के बीच यह एक आम धारणा है कि कैंसर का मुख्य कारण केवल निकोटिन है, जबकि वास्तव में सबसे ज्यादा नुकसान तंबाकू सेवन की प्रक्रिया से होता है। तंबाकू के सेवन पर हजारों जहरीले रसायन निकलते हैं, जिनमें टार और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे तत्व शामिल हैं, जो शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी धूम्रपान छोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। NRT विशेष रूप से धूम्रपान छोड़ने में मदद के लिए तैयार की गई है। इसमें नियंत्रित मात्रा में फार्मास्यूटिकल-ग्रेड निकोटिन दिया जाता है, लेकिन सिगरेट या बीड़ी में मौजूद हानिकारक विषैले तत्व इसमें नहीं होते। यही वजह है कि धूम्रपान छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह एक अपेाकृत सुरक्षित विकल्प माना जाता है। NRT धूम्रपान की इच्छा और उससे जुड़े विड्रॉल लक्षणों को कम करने में मदद करती है, जो दोबारा धूम्रपान शुरू करने का बड़ा कारण बनते हैं। सही तरीके से और काउंसलिंग के साथ इस्तेमाल करने पर यह धूम्रपान छोड़ने की संभावना को काफी बढ़ा सकती है।”
निकोटिन को केवल एक अलग तत्व के रूप में देखने के बजाय यह समझना जरूरी है कि इसे शरीर तक पहुंचाने के अलग-अलग तरीके स्वास्थ्य पर किस तरह असर डालते हैं। हानिकारक तंबाकू उत्पादों से हटकर नियंत्रित और अपेाकृत सुरक्षित निकोटिन विकल्पों की ओर बढ़ना, धूम्रपान पूरी तरह छोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। जयपुर में तंबाकू नियंत्रण को लेकर प्रयासों के मजबूत होने के साथ-साथ अब संदेश भी बदल रहा है। अब सिर्फ तंबाकू सेवन से बचने की सलाह देने तक बात सीमित नहीं है। NRT जैसे वैज्ञानिक और आसानी से उपलब्ध विकल्पों के जरिए लोगों को धूम्रपान छोड़ने में मदद करने की दिशा में काम किया जा रहा है।