जयपुर-राजस्थान के सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे व्यावसायिक प्रशिक्षकों की सेवा स्थिति और भविष्य को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि प्रशिक्षकों से विद्यार्थियों के कौशल विकास से जुड़े महत्वपूर्ण सेवाएं लि जा रही हैं, लेकिन उनके सेवा हितों और भविष्य की सुरक्षा के सवाल पर विभाग की ओर से अलग रुख अपनाया जा रहा है।
समिति पदाधिकारियों के अनुसार, नए टेंडर के दौरान प्रभावित हुए कुछ व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने न्यायालय की शरण ली। इसी क्रम में राजस्थान हाईकोर्ट में VTP के माध्यम से व्यावसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित प्रकरण सामने आया। संगठन के अनुसार, 17 अगस्त 2026 के अंतरिम आदेश में संबंधित ई-बिड प्रक्रिया एवं उससे जुड़ी कार्यवाही पर रोक लगाई गई। इसके बाद 20 अगस्त 2026 के आदेश में भी 17 अगस्त के अंतरिम आदेश का उल्लेख करते हुए 19 जून 2026 के NIB के तहत VTP के माध्यम से नियुक्ति संबंधी कार्यवाही पर रोक तथा याचिकाकर्ताओं को वर्तमान पदों पर जारी रखने संबंधी निर्देश दर्ज किए गए हैं।
जिम्मेदारी से भागता विभाग
व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष पवन गर्ग ने कहा कि प्रशिक्षकों से सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों के कौशल विकास, औद्योगिक भ्रमण, ऑन-जॉब ट्रेनिंग, स्किल एग्जिबिशन सहित विभिन्न गतिविधियों में जिम्मेदारी निभाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि संगठन का सवाल यह है कि यदि व्यावसायिक प्रशिक्षकों को विभाग के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती हैं, तो उनके मानदेय, सेवा सुरक्षा और भविष्य से जुड़े विषयों पर स्पष्ट नीति क्यों नहीं बनाई जा रही है।
गर्ग के अनुसार, प्रशिक्षक लंबे समय से सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को रोजगारपरक एवं कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने में योगदान दे रहे हैं। संगठन का मानना है कि केवल एजेंसी अथवा टेंडर आधारित व्यवस्था पर निर्भर रहने से प्रशिक्षकों के भविष्य में अनिश्चितता बनी रहती है।
मुख्यमंत्री जनसुनवाई से लेकर आंदोलन तक उठाया मुद्दा
व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति के मुख्य संरक्षक रघुपाल सिंह ने कहा कि प्रशिक्षकों की समस्याओं को लेकर संगठन की ओर से मुख्यमंत्री जनसुनवाई सहित विभिन्न स्तरों पर अपनी बात रखी गई है। एजेंसियों से संबंधित समस्याओं को लेकर विभाग को ज्ञापन एवं शिकायतें भी दी गईं।
सिंह ने दावा किया कि वर्तमान में कई व्यावसायिक प्रशिक्षकों का 5 से 11 माह तक का मानदेय बकाया है। संगठन के अनुसार, बकाया भुगतान सहित अन्य सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए संगठन की ओर से विभिन्न जिलों में ज्ञापन, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अनुशंसा, आंदोलन एवं जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसे कार्यक्रम किए गए। संगठन का दावा है कि 80 से अधिक विधायकों से मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम अनुशंसा पत्र भी दिलवाए गए।
टेंडर प्रक्रिया को लेकर न्यायालय की शरण
समिति पदाधिकारियों का कहना है कि विभाग एवं सरकार के स्तर पर लंबे समय तक समाधान के प्रयास किए जाने के बाद भी टेंडर प्रक्रिया और प्रशिक्षकों की सेवा निरंतरता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर प्रभावित प्रशिक्षकों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
संगठन द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट के 20 अगस्त 2026 के आदेश में 19 जून 2026 के NIB 06/2026-27 के तहत VTP के माध्यम से व्यावसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित प्रकरण का उल्लेख है। आदेश में 17 अगस्त के अंतरिम आदेश के संदर्भ में ई-बिड तथा उससे संबंधित कार्यवाही पर रोक और याचिकाकर्ताओं को वर्तमान पदों पर जारी रखने संबंधी निर्देश दर्ज होने की बात कही गई है।
स्थायी नीति और सेवा सुरक्षा की मांग
व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति ने सरकार से वर्षों से सरकारी विद्यालयों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए स्पष्ट एवं स्थायी सेवा नीति बनाने की मांग की है।
समिति की प्रमुख मांगों में—
– लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान,
– प्रशिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करना,
– बार-बार टेंडर एवं एजेंसी परिवर्तन से उत्पन्न अनिश्चितता को समाप्त करना,
– व्यावसायिक शिक्षा के लिए दीर्घकालिक एवं स्पष्ट नीति बनाना,
– प्रशिक्षकों के अनुभव एवं सेवाकाल को नीति निर्माण में उचित महत्व देना
शामिल हैं।
हरियाणा सहित अन्य राज्यों में लागु है स्थायी नीति
समिति के जिलाध्यक्ष आर.एन. रावत ने कहा कि सरकार यदि विद्यार्थियों के लिए कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना चाहती है, तो उसके क्रियान्वयन में वर्षों से कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों की सेवा स्थिति पर भी स्पष्ट निर्णय आवश्यक है।
उन्होंने सरकार से हरियाणा राज्य की तर्ज पर स्थायी नीति की संभावनाओं पर विचार करने, प्रशिक्षकों के लंबित मानदेय का भुगतान कराने तथा सेवा सुरक्षा के संबंध में स्पष्ट व्यवस्था लागू करने की मांग की।
रावत का कहना है कि व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराना है और इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षकों के भविष्य से जुड़े प्रश्नों का दीर्घकालिक समाधान आवश्यक है।