बार-बार होने वाले दर्द, अकड़न और सूजन को नजरअंदाज न करने की विशेषज्ञों की सलाह
जयपुर, 12 अक्टूबर 2026: जोड़ों के दर्द को अक्सर बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा, लंबे समय तक काम करने का परिणाम या रोजमर्रा की गतिविधियों से होने वाला खिंचाव मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार होने वाला दर्द, अकड़न या सूजन जोड़ों से जुड़ी किसी अंतर्निहित बीमारी का संकेत हो सकती है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
12 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व गठिया दिवस (World Arthritis Day) के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने समय पर बीमारी की पहचान और उपचार के महत्व पर जोर दिया है। इस वर्ष की थीम “अपने सपनों को साकार करें” (Achieve Your Dreams) है, जो रूमेटिक एवं मस्कुलोस्केलेटल बीमारियों से जूझ रहे लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं को दर्शाती है। यह थीम इस बात पर भी जोर देती है कि समय पर उपचार और उचित सहयोग से लोगों को सक्रिय रहने तथा अपने लिए महत्वपूर्ण गतिविधियों को जारी रखने में मदद मिल सकती है।
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के एडिशनल डायरेक्टर, डॉ. दिलीप मेहता ने कहा, “जोड़ों के दर्द को अपने आप बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा नहीं मान लेना चाहिए, विशेषकर तब, जब दर्द लगातार बना रहे या रोजमर्रा की गतिविधियों में बाधा डालने लगे। समय पर निदान और उचित उपचार से जोड़ों की कार्यक्षमता बनाए रखने तथा लोगों को सक्रिय जीवन जीने में मदद मिल सकती है।”
डॉक्टर से कब परामर्श लें?
अधिक शारीरिक मेहनत के बाद होने वाली कभी-कभार की परेशानी आमतौर पर आराम करने से कम हो जाती है। हालांकि, निम्नलिखित लक्षण लगातार बने रहने या बार-बार होने पर डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए:
घुटनों, कूल्हों, कंधों, हाथों या अन्य जोड़ों में दर्द।
सुबह उठने पर या लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बाद जोड़ों में अकड़न।
जोड़ों के आसपास सूजन, छूने पर दर्द या असामान्य गर्माहट।
जोड़ को सामान्य रूप से मोड़ने या हिलाने-डुलाने में कठिनाई।
चलते समय, सीढ़ियां चढ़ते समय या व्यायाम करते समय दर्द।
जोड़ों का दर्द, जिससे नींद या रोजमर्रा की दिनचर्या प्रभावित हो।
गठिया केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं
गठिया (Arthritis) एक व्यापक शब्द है, जिसके अंतर्गत जोड़ों और उनके आसपास के ऊतकों को प्रभावित करने वाली कई बीमारियां आती हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस उम्र बढ़ने के साथ अधिक आम हो जाता है, लेकिन गठिया के सूजन संबंधी प्रकार युवाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं।
जोड़ों में पहले लगी चोट, अधिक वजन, बार-बार एक जैसी शारीरिक गतिविधियां करने से पड़ने वाला दबाव, कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां और आनुवंशिक कारक गठिया का जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए सही चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।
जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए उपयोगी सुझाव
वजन को स्वस्थ सीमा में बनाए रखें, ताकि शरीर का भार सहने वाले जोड़ों पर दबाव कम पड़े।
अपनी शारीरिक क्षमता और फिटनेस के अनुसार नियमित व्यायाम करें तथा सक्रिय रहें।
जोड़ों को सहारा देने वाली आसपास की मांसपेशियों को मजबूत बनाएं।
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने या खड़े रहने से बचें।
लगातार बने रहने वाले दर्द, अकड़न या सूजन को नजरअंदाज न करें।
दर्द लगातार बना रहे या बढ़ता जाए, तो डॉक्टर से परामर्श लें।
डॉक्टर द्वारा बताई गई व्यायाम, उपचार या पुनर्वास योजना का पालन करें।