पेशे से सरकारी अध्यापक दौसा जिले की सीमा मीना निर्धन छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की
निशुल्क तैयारी करवा बना रही हैं आत्मनिर्भर।
उनके प्रयासों से अब तक चार दर्जन से अधिक गरीब परिवार की छात्राएं बन सकी आत्मनिर्भर, कर रही हैं सरकारी नौकरियां।
खुद के लिए सपने बुनकर उन्हें सच करने की ख्वाहिश हर इंसान की है लेकिन गैैरों के सपनों को बिना किसी स्वार्थ के परवाज देना कोई सीमा मीना से पूछे। राजधानी से लगते दौसा जिले के रलावता गांव की सरकारी शिक्षक सीमा पिछले कई सालों से अभाव में पली-बढ़ी छात्राओं को अपने खर्चे पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवा आत्मनिर्भर बना रही हैं।
बकौल सीमा, ‘मैंने आसपास की लड़कियों में जुनून देखा, लगन देखी, मेहनत देखी और आखिर में पैसों की कमी चलते उनके सपनों को नतमस्तक होते भी देखा। चूंकि मैं खुद भी अभावों को मात देते हुए यहां तक पहुंची हूं, लिहाजा उनकी पीड़ा को समझते देर नहीं लगी। मैंने ठान लिया कि छात्राओं को केवल पैसों कमी के खातिर ठहरने नहीं दूंगी। मैं 2011 में ‘निशुल्क क्लासेजÓ के नाम से गरीब छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने लगी। शुरू में काफी दिक्कतें आईं लेकिन मेरे पति विनोद मीना ने मेरी भावनाओं को समझा और मेरे मानस का कमजोर नहीं होने दिया। शुरू में मैंने केवल दो लड़कियों को पढ़ाना शुरू किया। आज मेरी क्लासेज में 30-30 छात्राओं के कई बैच चलते हैं। पिछले पांच वर्षों में मैंने सैंकड़ों छात्राओं को तैयार करवाई उनमें चार दर्जन से भी ज्यादा छात्राएं आज राजस्थान पुलिस, अध्यापन, एसएससी, रेलवे और बैंक जैसे क्षेत्रों में चयनित हो समाज के लिए मिसाल पेश कर रही हैं।
निशुल्क क्लासेज से निकली और वर्तमान में तृतीय श्रेणी शिक्षक निशु गुर्जर बताती हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पापा ने मुझे ट्यूशन कराने में अक्षम थे। मैं आगे पढऩा चाहती थी, नौकरी करना चाहती थी। मैंने दीदी के बारे में सुना और उनकी क्लासेज जॉइन की। एक साल की कड़ी मेहनत के बाद मुझे 2012 में मौका मिला और मैंने उनकी और परिवारजनों की उम्मीद पर खरी उतरी।
निशुल्क क्लासेज में न केवल दौसा, बल्कि सवाई माधोपुर, करौली, भरतपुर, धौलपुर की जरूरतमंद छात्राएं अपने आने वाले कल को संवार रही हैं। तृतीय श्रेणी शिक्षक में एक और सफल अभ्यर्थी अर्चना मीना के मुताबिक दीदी ने केवल हमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाई हमें मानसिक रूप से भी मजबूत बनाया। क्लास में हमेशा यही कहती हैं कि रुकना नहीं, दबना नहीं, थमना नहीं, तुम्हारा संकल्प ही तुम्हारी शक्ति है। आज मैं भी उनके जैसा बन समाज को कुछ देने की इच्छा रखती हूं।
जिला और राज्य स्तर पर कई बार पुरस्कृत सीमा कहती हैं कि मैं ये नहीं कहती कि मैं कुछ विशेष कर रही हूं लेकिन कुछ भी कर रही हूं उससे में संतुष्ट हूं। अच्छा लगता है जब कोई मेरे काम को सराहता है। वे कहती हैं कि अगर हर व्यक्ति समाज को कुछ लौटाने का भाव रखे तो न केवल समाज के हर जरूरतमंद तबके को हम राहत दे सकते हैं।
मोबाइल : सीमा मीना/ विनोद मीना
94142-48122
97859-25827