गणेशजी सार्वभोमिक-सात्विक एवं सार्वकालिक देवता क्यों कहलाते हैं ?

डा. जे.के.गर्ग
शिव-पार्वती के पुत्र के रूप में भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेशजी ने जन्म लिया था | गणेशजी के जन्म के समय समस्त देवी देवता उन्हें आशीर्वाद देने को आये थे | भगवान विष्णु ने उन्हें ज्ञान का वहीं ब्रह्माजी ने उनको यश और पूजन का आशीर्वाद दिया | धर्मराज ने गणेशजी को धर्म एवं दया का आशीर्वाद दिया | भगवान शिव ने उन्हें उदारता, बुद्धी,शक्ति और आत्म संयम का आशीर्वाद दिया | माता लक्ष्मी ने कहा जहाँ गणेश रहेगें वहीं मै रहूगीं | माता सरस्वती ने उन्हें स्म्रति,वाकपटुता-वक्तव्य शक्ति और वाणी का आशीर्वाद दिया | सावित्री ने गणेशजी को बुद्धी दी | ब्रम्हा-विष्णु-महेश ने गणेश को अग्रपूज्य, प्रथम देव और रिद्धि-सिद्धि प्रदाता का वरदान दिया | विभिन्न देवी-देवताओं के आशीर्वचन और वरदान से ही गणेशजी सार्वभोमिक, सार्वकालिक,सात्विक और सार्वदेशिक लोकप्रिय देव है | गणेशजी तिब्बत-सिंध-जापान-श्रीलंका सहित भारत भर की संस्क्रती के अन्दर समाये है | सच्चाई तो यही है कि गणेशजी जैन धर्म में ज्ञान-बुद्धि-सम्पन्नता का संकलन करने वाले गणों के प्रमुख के रूप में स्थापित है | बोद्ध धर्म की वज्रयान शाखा का मानना है कि गणेशजी की स्तुति-आराधना के बिना मन्त्र सिद्धि मुमकिन नहीं है | तिब्बत और नेपाल के वज्रयानी सम्प्रदाय के बोद्ध अपने आराध्यदेव भगवान बुद्ध की मूर्ति के समीप गणेशजी की मूर्ति भी स्थापित करते हैं | निसंदेह गणेशजी विघ्नहर्ता,सम्रद्धि, रिद्धि-सिद्धि, आनन्द, वैभव और ज्ञान के देवता के रूप में जाने जाते हैं |

जानिये ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक क्या है गणेशजी की महिमा

ज्योतिष्शास्त्र के अनुसार गणेशजी को केतु के रूप मे जाना जाता है, केतु एक छाया ग्रह है, जो राहु नामक छाया ग्रह से हमेशा विरोध मे रहता है, बिना विरोध के ज्ञान नही आता है और बिना ज्ञान के मुक्ति नही है, गणेशजी को मानने वालों का मुख्य प्रयोजन उनको सर्वत्र देखना है, गणेश अगर साधन है तो संसार के प्रत्येक कण मे वह विद्यमान है। उदाहरण के लिये तो जो साधन है वही गणेश है, जीवन को चलाने के लिये अनाज की आवश्यकता होती है, जीवन को चलाने का साधन अनाज है, तो अनाज गणेश है, अनाज को पैदा करने के लिये किसान की आवश्यकता होती है, तो किसान गणेश है, किसान को अनाज बोने और निकालने के लिये बैलों की आवश्यक्ता होती है तो बैल भी गणेश है, अनाज बोने के लिये खेत की आवश्यक्ता होती है, तो खेत गणेश है, अनाज को रखने के लिये भण्डारण स्थान की आवश्यक्ता होती है तो भण्डारण का स्थान भी गणेश है, अनाज के घर मे आने के बाद उसे पीस कर चक्की की आवश्यक्ता होती है तो चक्की भी गणेश है, चक्की से निकालकर रोटी बनाने के लिये तवे, चीमटे और रोटी बनाने वाले की आवश्यक्ता होती है, तो यह सभी गणेश है, खाने के लिये हाथों की आवश्यक्ता होती है, तो हाथ भी गणेश है, मुँह मे खाने के लिये दाँतों की आवश्यक्ता होती है, तो दाँत भी गणेश है, कहने के लिये जो भी साधन जीवन मे प्रयोग किये जाते वे सभी गणेश है |

संकलनकर्ता एवं प्रस्तुतिकरण—–डा. जे. के.गर्ग सन्दर्भ—- मेरी डायरी के पन्ने, विभिन्न पत्र पत्रिकाये (सुनहरा राजस्थान ( श्री ललित गर्ग ) संतो के प्रवर्चन आदि |

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