
प्रथम शैलपुत्री यानी हरड़
नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकारकी समस्याओं में काम आने वाली औषधि हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है। इसमें हरीतिका (हरी) भय को हरने वाली है। पथया – जो हित करने वाली है। कायस्थ – जो शरीर को बनाए रखने वाली है। अमृता – अमृत के समान हेमवती – हिमालय पर होने वाली। चेतकी -चित्त को प्रसन्न करने वाली है। श्रेयसी (यशदाता)- शिवा यानी कल्याण करने वाली।