मदर डे पर माँ के श्री चरणों में

dr. j k garg
माँ और क्षमा, दोनों एक हैं क्योंकि, माफ करने में दोनों एक हैं।
बचपन के आठ साल तुझे, अंगुली पकड़कर जो माँ—बाप, स्कूल ले जाते थे, उस माँ—बाप को, बुढ़ापे के आठ साल, सहारा बनकर मन्दिर ले जाना…..शायद थोड़ा सा तेरा कर्ज, थोड़ा सा तेरा फर्ज पूरा होगा।

जिस दिन तुम्हारे कारण माँ— बाप की आँख में आँसू आते हैं, याद रखना …….
उस दिन तुम्हारा किया सारा धर्म आँसू में बह जाता है।
पत्नी पसंद से मिल सकती है, माँ पुण्य से ही मिलती है। पसंद से मिलने वाली के लिये, पुण्य से मिलने वाली को मत ठुकराना।

माँ को जानने वाला ही परमात्मा को जान सकता है।
किसी ने मां के कंधें परसर रख के पूछा मां कब तक अपने कंधों पर सोने दोगी ? मां ने कहा जब तक लोग मुझे अपने कंधें पर न उठा लें |………..अज्ञात

मत कहिये मेरे साथ रहती है मां, कहिये कि मां के साथ रहते हैं हम |

मां भगवान से भेजा गया एक फरिस्ता है———————-अज्ञात

मैं जो कुछ भी हूँ या होने की आशा रखता हूँ उसका श्रेय मेरी माँ को जाता है .–अब्राहम लिंकन
मातृत्व : सारा प्रेम वहीँ से आरम्भ और अंत होता है |

कयकीनन मेरी माँ मेरी चट्टान है————–अज्ञात .

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