दीपावली कार्तिक अमावस्या को ही क्यों मनाई जाती है?Part 2

dr. j k garg
24वें तीर्थंकर महावीर स्वामीजी को इस दिन बिहार के पावापुरी मै निर्वाण की प्राप्ति हुई थी जिसके उपलक्ष्य में जैनियों में यह दिन दिवाली के रूप में मनाया जाता है। महावीर-निर्वाण संवत इसके दूसरे दिन से शुरू होता है इसलिए अनेक प्रांतों में इसे वर्ष के आरंभ की शुरुआत मानते हैं। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की स्थापना भी वर्ष 1577 में दीवाली के मौके पर की गयी थी। तीसरे गुरु अमरदास जी ने दिवाली को लाल-पत्र दिन के पारंपरिक रुप में बदल दिया जिस पर सभी सिख अपने गुरुजनों का आशार्वाद पाने के लिये एक साथ मिलते है। सिख धर्म में इस दिन को बंदी छोड़ दिवस के रुप में जाना जाता है महर्षि दयानंद ने वर्ष 1875 में आर्य समाज की स्थापना की थी | महान समाज सुधारक महर्षि दयानंद सरस्वती ने कार्तिक मास की अमावस्या के दिन अजमेर में निर्वाण प्राप्त किया। उसी दिन से इस दिन को दिवाली के रूप में मनाया जा रहा है। मारवाड़ी कार्तिक की कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन पर दिवाली पर अपने नए साल का उत्सव मनाते हैं एवं नये बही खाते प्रारम्भ करते हैं। गुजराती भी कार्तिक के महीने में शुक्ल पक्ष के पहले दिन दीवाली के एक दिन बाद अपने नए साल का उत्सव मनाते है। दिवाली शुरुआत में फसलों की कटाई के उत्सव के रुप में मनाई जाती थी। यह वह समय है जब भारत में किसान फसल काटकर संपत्ति और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं और उन्हें नई फसल में से उनका हिस्सा समर्पित करते हैं।

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