dr. j k gargमर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की संकल्प शक्ति, योगीराज भगवान श्रीकृष्ण की राजनीतिक कुशलता चातुर्य एवं कूटनीति और आचार्य चाणक्य की निश्चयात्मिका बुद्धि के धनी राजनीतिज्ञ व्यक्तियों में जन नायक अटल बिहारी का नाम सम्मान के साथ लिया जाता हैं क्योकिं अटल जी ने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण राष्ट्र सेवा हेतु अर्पित किया था। उनका तो मन्त्र था“ देश के लिए जियें और देश के लिए ही मरें, भारत माता का कण-कण शंकर है, वहीं पानी की बूंद-बूंद गंगाजल है” |अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, भारत तो जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है । हिमालय इसका मस्तक है, गौरीशंकर इसकी शिखा है । कश्मीर किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं । दिल्ली इसका दिल है । विन्ध्याचल कटि है, नर्मदा करधनी है । पूर्वी और पश्चिमी घाट इसकी दो विशाल जंघाएं हैं । कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है । पावस के काले-काले मेघ इसके कुंतल केश हैं । चांद और सूरज इसकी आरती उतारते हैं, मलयानिल चंवर घुलता है । यह वन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है । यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है । इसका कंकर-कंकर शंकर है, इसका बिंदु-बिंदु गंगाजल है । हम जिएंगे तो इसके लिए, मरेंगे तो इसके लिए । उन्होंने बतलाया कि हिन्दू धर्म तथा संस्कृति की एक बड़ी विशेषता समय के साथ बदलने की उसकी क्षमता रही है । अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे कि मनुष्य जीवन अनमोल निधि है, पुण्य का प्रसाद है । हम केवल अपने लिए न जिए, औरों के लिए भी जिए । जीवन जीना एक कला है, एक विज्ञान है । दोनों का समन्वय आवश्यक है उन्होंने अनेको बार कहा है कि “भारत के लिए हँसते-हँसते प्राण न्योछावर करने में मैं गर्व का अनुभव करूँगा”।