बात बढ़ जाएगी

Natwar Parik 20141110_072714आदतें खुद-ब-खुद ही सुधर जाएगी ,
कुछ कहोगे तो फिर बात बढ़ जाएगी |

हम दिवाली पे दीपक जलाते रहे ,
उस तरफ वो खड़े थे हवाएँ लिए |

हम जलाते रहे, वो बुझाते रहे ,
अड़चनें हारकर स्वयं ही थक जाएगी |

हैं अनाड़ी वो कितने जरा देखिए ,
शाख को काटते जिस पे बैठे हुए |

गिर पड़ोगे अभी, मत कहो ये कभी,
चोट लगने से भूलें सुधर जाएगी |

चलते रहना मुझे , बस यही सोचिए ,
जाँचना है यदि खुद को ही जाँचिए |

जीत या हार में , तट या मँझदार में ,
धैर्य- संयम रखें, राह मिल जाएगी |

-डॉ. नटवर विद्यार्थी
सम्पर्क- 9414548148

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