
वह है कौन यह तो जांच के बाद ही पता लग पाएगा, मगर उसने भ्रम यह फैलाया है कि वह खादिम है।
दिलचस्प पहलु ये है कि उसने पत्र लिखने का जो समय चुना है, उसके पीछे भी उसका मकसद है। अकबर के किले का नाम अजमेर का किला एवं संग्रहालय कर दिए जाने को काफी वक्त हो गया है। अगर उसे ऐतराज था तो तभी विरोध दर्ज करवाना चाहिए था, मगर उसने ऐसा समय चुना है, जबकि इस वक्त राजस्थान विधानसभा चल रही है। हो सकता है कि उसका ख्याल हो कि इस प्रकार का धमकीभरा पत्र लिखने पर उसकी चर्चा ज्यादा होगी। स्वाभाविक सी बात है कि राज्य के किसी मंत्री को एक समुदाय विशेष का व्यक्ति धमकी देगा तो उससे सनसनी तो होनी ही है, वह भी एक ऐसे ऐतिहासिक स्थल को लेकर जिसके साथ समुदाय विशेष की शख्सियत का ताल्लुक है।
बहरहाल, पुलिस को उस तरन्नुम चिश्ती का तो पता लगाना ही चाहिए, साथ ही इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए कि कहीं कोई असामाजिक तत्व अजमेर के सांप्रदायिक सौहार्द्र को तो नहीं बिगाडऩा चाह रहा।
-तेजवानी गिरधर
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