दहेज़ लेने बालों को संस्कार नहीं मिल सकते -संतोष गंगेले

zzछतरपुर -बर्तमान समय में अधिकांश परिवारों में दहेज़ के कारण कलह हो रहा है साथ ही दहेज़ लेने बालो के घर संस्कार चले जाते है। यदि आम व्यक्ति परिवारों में खुशहाली ,सुख शांति चाहता है तो उसे समाज के लिए ही नहीं अपने जीवन में कुछ त्याग करना होता है।

विगत दिनों दिवस हरिहर भवन नौगाव में एक सर्व ब्राह्मण समाज की बैठक का आयोजन किया गया था जिसमे बुंदेलखंड के बरिष्ठ पत्रकार संतोष गंगेले कर्मयोगी ने समाज को सम्बोधित करते हुए कहा था की जहाँ कथनी और करनी में अंतर् हो जाता है , वहां धर्म नहीं रहता। इसीलिए व्यक्ति को अपने संकल्प और कथनी में अंतर् नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा की मध्य प्रदेश अखिल ब्राह्मण समाज जबलपुर में पिछले दो बर्ष पूर्व मानस भवन में आयोजित ब्राह्मण समाज ने संतोष गंगेले को समाज गौरव सम्मान से सम्मानित किया था। उसी समय जबलपुर में संतोष गंगेले ने अपना संकल्प लिया था की वह अपने बेटे राजदीप गंगेले [एम् बी ए अंग्रेजी माध्यम ] पुणे महाराष्ट्र से अध्ययनरत बेटे का बिबाह बिना दहेज़ करेंगे। इस बात को लेकर नौगाव के समाजसेवी श्री रमाशंकर मिश्र मनीषी जी के निवास पर बैठक बुलाई गई। बैठक में तय किया की माध्यम परिवार से कोई भी समाज के बेटी जो बी ए पास हो इस रिश्ते को स्वीकार कर सकता है , इसकी जानकारी सोशल मिडिया पर भी दी गई। लेकिन कोई विश्वास ही नहीं कर सकता था की बिना दहेज़ शादी होगी।
बुंदेलखंड के बरिष्ठ पत्रकार संतोष गंगेले कर्मयोगी ने समाज को दिए बचन का पालन किया और अपने बेटे का विवाह आलीपुरा जिला छतरपुर में कर समाज के बीच नजीर प्रस्तुत कर दी। आज परिवार में भारतीय संस्कृति की अलख मिल रही है . दहेज़ से परहेज करने के कारण ईश्वर ने इस घर में सुख शांति ,खुशियाँ तो भर ही दी है साथ ही मर्यादाओ का पुत्रबधु लगातार ध्यान रखती है। घर में सुबह से पूजा श्री राम चरित मानस पाठ ,आरती को स्थान है वही सास -बहु में माँ -बेटी जैसे रिश्ते कायम है। आम व्यक्ति को दहेज़ का त्याग कर समाज में कलंक को मिटाने गुणवान ,संस्कारो को स्थान देना चाहिए न की धन को।

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