आपने राजनीति में नेता तो बहुत देखें होंगे। लेकिन उन जैसे नेता बिरले ही होते हैं, जिन्होंने राजनीतिक मक्कारी,दोगलेपन,बेईमानी से खुद को हमेशा दूर रखा। जिन्होंने राजनीति में दुश्मन नही,दोस्त बनाए। जो राजनीतिक कारणों से उनका विरोधी भी हुआ,वो भी उनके व्यक्तित्व के आगे नतमस्तक रहा। उन्होंने कभी अपनी पार्टी के सत्ता में रहते हुए भी सत्ता का दुरूपयोग नहीं किया। ऐसे ही हैं पूरणाशंकर दशोरा। भारतीय जनता पार्टी के शहर अध्यक्ष सहित पार्टी में कई पदों पर रहे,लेकिन कभी भी उनके ऊपर कोई आरोप नहीं लगा। हर नेता से उनके मधुर संबंध रहे। बीजेपी ही नहीं,कांग्रेस के नेता भी उनका उतना ही सम्मान करते हैं। स्नेही और आत्मीय इतने कि जो एक बार उनसे मिला,हमेशा के लिए उनका हो गया। दशोराजी से आज जिसके भी संबंध है,वो पारिवारिक हैं। क्योकि उन्होंने राजनीतिक स्वार्थ के लिए कभी किसी से रिश्ता बनाया ही नहीं। और जिससे एक बार रिश्ता बनाया, उसे दशोराजी शिद्दत से निभाते हैं। ये उनका जिंदादिल स्वभाव ही हैं कि उनके दोस्तों की फेहरिस्त में उम्र की सीमा नहीं है। उनसे उम्र में छोटे अनेक लोग उनके दोस्त हैं और उन्हें वो भी मार्गदर्शन देते हैं। बिल्कुल किसी अभिभावक और बडे भाई के रूप में। ये मेरा सौभाग्य है कि मैं आदरणीय दशोराजी से पिछले 35 सालों से जुड़ा हूं। जबकि मैं खुद उनसे 16 साल छोटा हूं। लेकिन संबंधों में उम्र यह अंतर कभी बाधा नहीं बना। जहां नेता पत्रकारों से इस लालच में सम्बन्ध बनाते हैं कि उन्हें प्रचार का ज्यादा अवसर मिलेगा। वहीं दशोराजी ने कभी मुझे इसके लिए नहीं कहा। नवज्योति में उनके लिए कई ऐसी खबरें भी लिखी,जो राजनीतिक रूप से उनके लिए नुकसानदायक रही। लेकिन उन्होंने कभी ये नहीं कहा,ऐसा क्यों लिखा। राजनीति से इतर वकालत में भी उन्होंने कामयाबी के झंडे गाड़े हैं।
