
आपको अगर किसी परिचित अथवा अपरिचित ने जानबुझ कर या अनजाने में नुकसान पहुंचाया है या आपको दर्द दिया है तो भी उसे दिल से माफ कीजिये, उसे सकारात्मक सोच की तरगें भेजिए और अपने जीवन पथ में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ते रहिये, उसे माफ़ करने के लिये इस बात का इंतजार नहीं करें कि उसने आप से माफी मागीं है अथवा नहीं |
जीवन में जाने-अनजाने में उन लोगों से सम्पर्क, मुलाकात अथवा जान पहिचान हो जाती हैं जिनकी सोच नकारात्मक,ईर्ष्यालु एवम् दुर्षित होती है, ऐसे लोगों से जितना जल्दी हो उतना जल्दी पीछा छुड़ायें क्योंकि कावत है “ जैसी संगत वैसी ही गत। सकारात्मक सोच वालों की संगत में रहे | व्यर्थ की टीकाटिप्णी करनेवाले वाले इंसानों से दूर ही रहें |
प्रस्तुती—डा. जे.के.गर्ग, सन्दर्भ—मेरी डायरी के पन्ने,विभिन्न पत्रिकायें आदि visit our blog—gargjugalvinod.blogspot.in