बीकानेर, 14 सितम्बर 2017। हिन्दी दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र तथा केन्द्रीय भेड़ व ऊन अनुसंधान संस्थान में गुरूवार को कार्यक्रम आयोजित किए गए तथा हिन्दी पखवाड़े का शुभारम्भ हुआ।
राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र में आयोजित कार्यक्रम में केन्द्र के निदेशक प्रभारी डॉ. आर. के. सावल ने कहा कि हिन्दी पखवाड़े के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का उद्देश्य हिन्दी को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान को सहज व सरल हिन्दी भाषा के माध्यम से ऊंट पालकों तक पहुंचाएं ताकि केन्द्र के अनुसंधानों की सार्थकता सिद्ध हो।
कार्यक्रम में राजभाषा प्रभारी डॉ. ए.के.नागपाल ने कहा कि आज हिन्दी आजीविका का प्रमुख साधन बनती जा रही है। टी.वी. चैनल आदि में हिन्दी अपना परचम फहरा रही है। वैश्विक पटल पर इस भाषा की मांग बढ़ी है। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राघवेन्द्र सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.एफ.सी.टुटेजा, सहा.मुख्य तकनीकी अधिकारी दिनेश मुंजाल, वैयक्तिक सहायक हरपाल सिंह कौंडल ने भी अपने विचार रखे। संचालन वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी नेमीचंद बारासा ने किया।
केन्द्र में 28 सितम्बर तक मनाये जा रहे इस पखवाड़े के दौरान हिन्दी में सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी, निबंध लेखन प्रतियोगिता, शोध-पत्र वाचन प्रतियोगिता, वाद-विवाद प्रतियोगिता तथा राजभाषा कार्यशाला जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएगी।
हिन्दी दिवस पर केन्द्रीय भेड़ व ऊन अनुसंधान संस्थान में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पशु विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ त्रिभुवन शर्मा ने कहा कि देश की उतरोतर प्रगति मौलिक भाषा द्वारा ही संभव है। विशिष्ट अतिथि अश्व अनुसंधान केन्द्र प्रभारी डॉ शरद चंद मेहता ने कहा कि किसानों व वैज्ञानिकों के मध्य संवाद हिन्दी के द्वारा ही संभव है। उत्तर पश्चिम रेलवे के नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सचिव अनिल शर्मा ने राजभाषा से जुड़ी नवीनतम जानकारियां दीं तथा कम्प्यूटर पर यूनिक कोर्ड में हिन्दी वॉईस टंकण का प्रशिक्षण दिया। प्रभागाध्यक्ष डॉ ए के पटेल ने सप्ताह के दौरान आयोजित होने वाली टंकण, निबंध लेखन, श्रुतिलेख, शोध पत्र, पोस्टर, सामान्य ज्ञान, टिप्पण लेखन, स्वरचित कविता पाठ के कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर पांच प्रतिभागियों ने हिन्दी में स्वरचित कविता पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ अशोक कुमार किया। डॉ निर्मला सैनी ने आभार व्यक्त किया।
भाकृअनुप-केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान में गुरूवार को हिन्दी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर साहित्यकार डॉ. उषा किरण सोनी मुख्य अतिथि थीं। उन्होंने कहा कि हिन्दी दिवस को 14 सितम्बर को मनाने की परम्परा वर्ष 1953 से आरंभ की गई। हिन्दी में विज्ञान की शिक्षा सरलता से दी जा सकती है अतः सभी को इस प्रकार के प्रयास करने चाहिए। हिंदी सरल और वैज्ञानिक भाषा है। इसमें वैज्ञानिक साहित्य का सृजन सरलता से किया जा सकता है। आज हिंदी विश्व के 218 विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है।
इस अवसर पर संस्थान के प्रभारी निदेशक डॉ. बृजेश दत्त शर्मा ने कहा कि वैज्ञानिकों को हिंदी में अपने शोध लेखों को लिखने की आदत डालनी होगी। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के संस्थानों में हिंदी का प्रयोग बढ़ रहा है। कार्यालय के दिन प्रतिदिन के कार्य में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने के लिये हमें प्रयास करने चाहिए। इससे पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रामदीन ने अतिथियों का स्वागत किया और राजभाषा अधिकारी प्रेम प्रकाश पारीक हिन्दी चेतना पखवाडे़ के दौरान आयोजित किए गये कार्यक्रमों के बारे में बताया और कार्यक्रम में उपस्थित आगन्तुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
– मोहन थानवी