बीकानेर, 7 दिसम्बर। स्व. बुलादेवी एवं स्व. सोहनलाल ओझा की स्मृति में गुरुवार को नापासर के राजकीय सीनियर माध्यमिक विद्यालय में विज्ञान भवन का लोकार्पण जयपुर नगर निगम के मेयर डॉ. अशोक लाहौटी ने किया।
इस अवसर पर डॉ. लाहौटी ने ग्रामवासियों से कहा कि नापासर गांव में साफ-सफाई रखें ताकि इलाके में बीमारी नहीं फैले। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्राी श्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्राी श्रीमती वसुंधरा राजे के डिजीटल इंडिया फोकस को देखते हुए नापासर में विज्ञान भवन व कम्प्यूटर भवन का लोकार्पण करते हुए कम्प्यूटर लगाए गए हैं। इनकी सोच के अनुसार गांवों को भी डिजीटल बनाया जा रहा है।
माई इंडिया मेरा भारत एनजीओ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कुमार ओझा व राष्ट्रीय महासचिव नेहा राय ने बताया कि इस विज्ञान भवन में 1.25 करोड़ रुपए की लागत आई है। ओझा ने बताया कि आज के युग में कम्प्यूटर एवं विज्ञान की शिक्षा के बिना विद्यार्थी आगे नहीं बढ़ सकता, गांव व देश आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने बताया कि उन्होंने नापासर एवं आस-पास गांव के बच्चों को कम्प्यूटर एवं विज्ञान की शिक्षा दिलाने का सपना देखा। उनका ये सपना विद्यालय प्रधानाचार्य संतलाल पूनिया, अशोक मूंधड़ा आदि की प्रेरणा से पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि आस-पास के गांवों की बच्चियां कॉलेज के अभाव में उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती हैं, यदि प्रशासनिक स्तर एवं राजनीतिक स्तर पर प्रयास कर नापासर में कॉलेज हेतु स्वीकृृति लायी जाए, तो वे कॉलेज के लिए तैयार हैं।
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक विजयशंकर आचार्य, सूर्यकरन सारस्वत, बाबूलाल मोहता, उपाध्यक्ष अरुण शर्मा, अशोक सारस्वत सहित नापासर तथा आस-पास गांवों के गणमान्य लोग शामिल हुए।
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बाजरा के खाद्य प्रसंस्करण की दी जानकारी
बीकानेर, 7 दिसम्बर। स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृृषि विश्वविद्यालय के तत्त्वावधान में कृृषि विज्ञान केंद्र की राष्ट्रीय कृृषि विकास परियोजना के अंतर्गत बाजरा के खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य वृद्धि विषय पर दक्ष प्रशिक्षक के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन गुरूवार को परिसर में किया गया। प्रशिक्षण में बीकानेर, देशनोक और नोखा सेक्टर की महिला पर्यवेक्षक एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
केंद्र के वरिष्ठ वज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ.रामधन जाट ने प्रशिक्षार्थियों को बाजरा की उपयोगिता बताते हुए आग्रह किया कि वे बाजरा को अपने आहार में सम्मिलित करें। गृह विज्ञान विभाग की पोषण विशेषज्ञ डॉ. विमला डुकवाल ने बाजरा में उपलब्ध पोषक तत्वों की उपयोगिता बताते हुए कहा कि परंपरागत खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए गुणकारी हैं। हम इनका मूल्य संवर्धन करके स्वरोजगार के रूप में अपना सकते हैं और समाज के स्वास्थ्य को अच्छा रखने में अपना योगदान दे सकते हैं।
डॉ. दीपक चतुर्वेदी, डॉ. उपेंद्र मील, डॉ. रीमा राठौड़ व शिमला मीना ने बाजरे के केक, खाखरे, बिस्कुट, कुरकुरे और बर्फी उत्पाद बनाकर प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया।