एस.वासुदेव स्मृति त्रिदिवसीय समारोह में खेला गया नाटक ‘‘गिद्ध’’

जयपुर। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जोधपुर एवं ज्योति कला संस्थान, जयपुर के सयुंक्त तत्वावधान में राजस्थान के जाने माने नाट्यगुरू परम आदरणीय स्वर्गीय श्री एस. वासुदेव की स्मृति में दिनांक 23 से 25 फरवरी 2019 तक त्रिदिवसीय नाट्य समारोह का अयोजन जयपुर में रवीन्द्र मंच के मुख्य सभागार में सांय 7.00 बजे तीन नाटक सफलतापूर्वक खेले गए।
समारोह में प्रथम दिवस शनिवार, दिनांक 23 फरवरी को ज्योति कला संस्थान, जयपुर द्वारा प्रस्तुत सुप्रसिद्ध डा. विजय तेडुलकर लिखित यह विवादास्पद नाटक व्यंग्य के माध्यम से नई पीढ़ी विकास के दौर में अपनी सम्पन्नता को बढ़ाने के लिए सभी नैतिक मूल्यों को ताक में रख संघर्ष कर रही है, जबकि पुरानी पीढ़ी नैतिकता के आधार पर जीवन जीकर नई पीढ़ी को कोस रही है। दूसरे शब्दों में दोनो ही पीढ़ियां अपने अपने तरीके से नैतिकता का ढोल पीट रही है। यह नाटक पुरानी व नई पीढ़ी के बीच पनप रहे मानसिक तनावों को दर्शाता है। नाटक की कहानी एक ऐसे पिता के जीवन पर केन्द्रित है जो जीवन भर कड़ी मेहनत कर दौलत जमा करता है और औलाद के व्यस्क होने पर उनमें जायदाद का बंटवारा कर देता है मगर सम्पन्नता बढ़ाने के लालच मे सभी एक दूसरे के हक को हड़पने लगते हैं। यह नाटक वरिष्ठ रंगकर्मी सुरेश सिन्धु द्वारा निर्देशित किया गया। इस नाटक में जयपुर के वरिष्ठ रंगकर्मीयों द्वारा अपनी अभिनय कौशलता का परिचय दिया। नाटक में रजनीकान्त (राजदीप सिंह) रमाकान्त (विनोद जोशी) उपकान्त (विक्ट्र मोटवानी) पापा (अनिल मारवाड़ी), रमा (अन्नपूर्णा शर्मा) मार्णिम (माथुर)

error: Content is protected !!