अजमेर 5 जून ।भारत के युवाओं को देश की मुख्य धारा से जोड़ना होगा सूफ़ी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के वंशज एवं वंशानुगत सज्जादानशीन दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा किसी भी देश का युवा उस देश के विकास का सशक्त आधार होता है लेकिन जब यही युवा अपने सामाजिक और राजनैतिक जिम्मेदारियों को भूलकर विलासिता के कार्यों में अपना समय नष्ट करता है तब देश बर्बादी की ओर अग्रसर होने लगता है.युवा फूलो का गुलदस्ता बनकर भारत की ताक़त बने ।
दरगाह दीवान आबेदीन ने ईद के मोके पर ख्वाजा साहब की दरगाह स्थित खानकाह (ख्वाजा साहब के जीवनकाल में बैठने का स्थान) से देशवासियों और अपने अनुयाइयो के नाम ईद की मुबारकबाद का संदेश देते हुए कहा कि
दरगाह दीवान ने अपने सम्बोधन में कहा कि बदलते परिवेश में बच्चे वक्त से पहले ही ब़डे हो रहे हैं. एक तऱफ वे कम उम्र में तमाम तरह की उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तऱफ वे आपराधिक गतिविधियों को अंजाम भी दे रहे हैं. चोरी, अपहरण, फिरौती, किडनैपिंग, ब्लैकमेलिंग और रेप से लेकर हत्या करने से भी उन्हें कोई परहेज़ नहीं है. ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जब किशोरों ने अपनी यौन इच्छाओं की तृप्ति के लिए छोटी बच्चियों तक को शिकार बनाया है. हालांकि इसके लिए हमारी सामाजिक परिस्थितियां भी का़फी हद तक ज़िम्मेदार हैं. हमारी सामाजिक व्यवस्था में कई तरह की विसंगतियां हैं, जिनमें किशोर जाने-अनजाने अपराध की दुनिया में क़दम रख रहे हैं हाल ही में हुए अलवर के थानाकाग़ज़ी जेसी गैंग रेप की घटनाएँ जहा दिल को झींझोड़ती है वही समाज और देश को शर्मसार भी करती है ।
उन्होंने कहा कि आज ज़रूरत है के मुस्लिम युवा भारत की जम्हुरियत में अमन व सलामती और वफ़ा दारी का अहद करे क्यों की इस्लाम में अहद व पेमान (वादों ) के सम्बंध में ताक़ीद है और यह भी शिशा दी है की इंसान कितनी सख़्त हालत में क्यों ना हो मगर उसे अपने अहद पर क़ायम रहना चाहिय इस्लाम ने अहद तोड़ने से सख़्ती से माना फ़रमाया है और एसा करने वाली को सज़ा का हक़दार कहा है ।
मगर आज का दौर एसा हो गया है की एक देश अपने फायदे के लिय अहद ही नही तोड़ता बल्कि दूसरे पर अत्याचार भी करता है ।एक व्यक्ति कुछ कहता है और दूसरा कुछ पल पल में अपना बयान बदलते है । मगर इस्लाम इस बात की शिक्षा देता है की अगर किसी ने अहद कर लिया है तो उसे पूरा करना ही पड़ेगा चाहे उसे कितनी ही हानि क्यों ना उठानी पड़े ।इस का सार यह है की जिस किसी ने अपने देश के लोकतांत्रिक नियम के तहत अमन व शांति से रहने का अहद कर लिया है तो उसे वह वादा यानी अहद पूरा करना ही पड़ेगा ।
उन्होंने ने कहा की आज विश्वभर में अधिकतर युवा बिलासिता और सुख-सुविधा को देखते हुए अपनी देश की जमीन को छोड़कर दूसरी जगह जा रहे हैं जिससे राष्ट्र निर्माण में दिक्कतें आ रही हैं. युवा किसी भी राष्ट्र की शक्ति होते हैं और विशेषकर भारत जैसे महान राष्ट्र की उर्जा तो युवाओं में ही निहित है. ऐसे में अगर युवाओं का भारी संख्या में प्रवासन होता है तो इससे न केवल उस राष्ट्र की अक्षमता प्रदर्शित होती है जो अपने नौजवानों को प्रयाप्त साधन नहीं दे सकता बल्कि इससे देश की विकास का सशक्त आधार भी समाप्त हो जाता है।
दीवान अबेदीन ने कहा की आज हमारा देश स्वतंत्र होने के बावजूद अनगिनत समस्याओं से जूझ रहा है। बेकारी, गरीबी, शिक्षा, प्रदुषण एवं अन्न-जल तथा मँहगाई की समस्या से देश की जनता प्रभावित है मेरी यही कामना है कि हर हिन्दुस्तानी यह प्रण ले कि हमारी यह पीढ़ी एक ऐसे देश का निर्माण करेगी जिसमें हम सभी रहना चाहते हैं। हमारी यह पीढी़ एक ऐसे देश का निर्माण करेगी जिसे भावी पीढि़यों को सौंपने में हमें गर्व हो। हम जो निर्माण करना चाहते हैं, हमें जिन चीजों की फिक्र है, उसके लिए हम सब यह प्रण ले की हमारा भारत देश भष्टाचार से मुक्त होकर नया उजाला स्थापित करें।