जयपुर:पिछले 11 साल में 37.5 फीसदी सरकारी नौकरियां पिछड़े वर्ग के खाते में गई हैं भले ही राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 21 फीसदी हो। पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से राज्य सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। इसी रिपोर्ट में गुर्जर सहित ओबीसी में शामिल पांच जातियों को विशेष पिछड़ा मानने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि आरएएस,आरजेएस व राज्य सेवा में शामिल 12 सेवाओं में ओबीसी की 40 जातियों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
इनमें से आठ जाति हेला, मोगिया, सिरकीवाल, खैरवा, कूंजड़ा, गैर हिन्दू सपेरा, मुल्तानी व कोतवाल का तो द्वितीय व तृतीय श्रेणी की नौकरियों में भी कोई हिस्सा नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2001 से 30 सितम्बर 12 तक 269786 नियुक्तियां हुई हैं इनमें से 101245 पदों पर ओबीसी के अभ्यर्थी चयनित हुए। इनमें से गुर्जर सहित एसबीसी की 4 जातियों को 6846 पद ही मिल पाए। ओबीसी के लोगों में 53752 पदों पर चयन आरक्षण से हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार सतिया सिंधी,तम्बोली-तमोली, न्यायरिया-न्यारगर, खेलदार, गद्दी,सिलावट, मुल्तानी, भडभूजा,सिरकीवाल,सिकलीगर-बन्दूकसाज-उस्ता, चूनगर, फारूखी-भटियारा, सपेरा,जागरी,राठ,लोधे तंवर,हेला,चोबदार,मदारी, कोतवाल,ठठेरा,नट,मोगिया-मोग्या, खेरवा जातियों के पर्याप्त आंकड़े नहीं होने के कारण विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। वहीं गुर्जर आरक्षण समन्वय समिति के संयोजक महेन्द्र सिंह खेड़ला ने कहा कि 25 जातियों को एसबीसी के समकक्ष या उससे भी पिछड़ा होने के बारे में विस्तृत सर्वे की बात उठाकर 5 प्रतिशत एसबीसी आरक्षण इन जातियों के शामिल होने की संभावना जताकर गुर्जर आरक्षण पर तलवार लटका दी है।