आईये जाने प्रजातंत्र (लोकतंत्र) और गणतन्त्र के बीच अंतर एवं भारतीय सविंधान को Part 1

dr. j k garg
आम आदमी के मन में यदा कदा सवाल उत्पन्न होता है कि क्या गणतन्त्र और प्रजातंत्र एक ही है या उनमें अंतर है, और यदि अंतर है तो कैसे और क्या अंतर है ? वास्तविकता में जहाँ गणतंत्र में संविधान सर्वोच्च होता है वहीं प्रजातंत्र में जनता सर्वोच्च होती है । गणतंत्र में विधि का विधान यानि कानून का राज्य होता है तो प्रजातंत्र में बहुमत का। प्रजातंत्र में जिसके पास बहुमत होता है वही शासक होता है । उदाहरण के लिये रूस और चीन जैसे देशों में संविधान सर्वोपरि है किन्तु वे एकल पार्टी द्वारा शासित राज्य हैं अतः वे गणतंत्र तो हैं किन्तु प्रजातंत्र नहीं। गणतंत्र में निर्वाचित सरकार के अधिकार हमेशा संविधान की सीमाओं में बंधे होते हैं। नागरिकों की स्वीकृति से संविधान को अपनाया जाता है और इसे केवल जनता के प्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न नियमों के तहत संशोधित किया जा सकता है। संविधान के तीन प्रमुख अंग कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका होती है जिन्हें शक्ति संविधान देता है। ये तीनों यानि कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका एक दूसरे से स्वतन्त्र होते हैं तथा एक दूसरे के कार्यों या शक्तियों में हस्तक्षेप नहीं करते।

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