केकडी 13 अप्रेल (पवन राठी)आर्य समाज केकड़ी द्वारा नव वर्ष व आर्यसमाज का स्थापना दिवस अग्निहोत्र (यज्ञ) कर मनाया।
आर्य समाज के पुरोहित यज्ञमुनि ने बताया कि आज सृष्टि संवत, विक्रम संवत व आर्य समाज का स्थापना दिवस आर्यसमाज मंदिर में अग्निहोत्र (यज्ञ) कर मनाया गया। यज्ञ के पश्चात यज्ञमुनि ने कहा कि आज हम वैदिक संस्कृति को भूलते जा रहे हैं और पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ते जा रहे हैं। जिससे आने वाला समय हमारे लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आज भी हम सभी यज्ञ को अपनाकर कोरोना जैसी खतरनाक महामारी से जीत सकते हैं । यज्ञ का महत्व ऋषि दयानंद ने बहुत विस्तार से बताया है और हमें उसे जीवन मे अपनाना चाहिए।
संरक्षक वीरसिंह अलुदिया ने बताया की भारत की संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीनतम संस्कृति है जो समस्त विश्व के कल्याण के लिये है।
कोषाध्यक्ष सत्यनारायण सोनी ने बताया की वैदिक संस्कृति एवं ऋषियों के ज्ञान को प्रचार प्रसार के माध्यम से सर्वजन तक पहुचाने के लिए महर्षि दयानंद सरस्वती ने मुम्बई में आज ही के दिन 10 अप्रैल सन् 1875 ई. (चैत्र शुक्ला 5 शनिवार सम्वत् 1932 विक्रमी) को आर्यसमाज की स्थापना की जिसका मुख्य उद्देश्य वैदिक संस्कृति का प्रचार प्रसार रहा है हम आर्य समाज के सिद्धांतों से ही हमारे राष्ट्र और समाज की रक्षा कर सकते हैं और सुखमय जीवन जी सकते हैं।
कार्यक्रम में चिरंजी लाल सोनी, फूलचंद नागोरिया ,कमलेश कुमार माली ,बजरंग सिकलीगर, शंभू सिंह चौहान ,यशवंत बेली सहित सभी आर्य जन उपस्थित रहे।