जयपुर मेयर व पार्षदों के निलंवन के विरोध में भाजपा ने सोपा ज्ञापन

केकडी 11 जून(पवन राठी) / जयपुर ग्रेटर नगर निगम की भाजपा महापौर सौम्या गुर्जर व तीन पाषर्दों को राजनीतिक दुर्भावना के कारण निलंबित करने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी राजस्थान प्रदेश द्वारा प्रदेश व्यापी विरोध प्रदर्शन के क्रम में भाजपा अजमेर देहात जिलाध्यक्ष देवीशंकर भूतड़ा के निर्देशानुसार
केकडी शहर मण्डल के कार्यकर्ताओं द्वारा आज भाजपा नेता राजेन्द्र विनायका के नेतृत्व में उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन दिया गया,ज्ञापन में कहा गया की
राजस्थान में कॉग्रेस सरकार द्वारा कानून का दुरूपयोग कर जयपुर नगर निगम ग्रेटर की निर्वाचित भारतीय जनतापार्टी की महापौर सौम्या गुर्जर व निर्वाचित भारतीय जनता पार्टी के पार्षद अजयसिंह चौहान, शंकर शर्मा व पारस जैन को अवैधानिक रूप से निलंबित करना अवैध है क्योंकि नगर निगम ग्रेटर जयुपुर के पार्षद गणो का चुनाव सम्पन्न हुआ था जिसमें भारतीय जनता पार्टी की सौम्या गुर्जर महापौर चुनी गई इसके बाद से ही राज्य की कॉग्रेस सरकार में नगर निगम जयपुर ग्रेटर की महापौर व बोर्ड के
कार्यो में बाधा पहुँचाना प्रारंभ कर दिया, बोर्ड के चैयरमेनो के निर्वाचन के मामले में भी राज्य सरकार ने अडचन पैदा की । तब भी उच्च न्यायालय के आदेष के बाद ही विभिन्न समितियों के चैयरमेन अपना पद ग्रहण कर पाये,वर्तमान में जयपुर नगर निगम के क्षेत्र में सफाई व्यवस्था जिस कम्पनीको दी गई थी। उस बी.बी.जी. कम्पनी द्वारा सफाई कार्य ठीक से सम्पादित नहीं किया जा रहा था तथा हडताल कर दी गई थी, जिससे शहर में सफाई व्यवस्था चरमरा गई तथा गन्दगी के ढेर होने लगे। कोविड महामारी के दौरान गन्दगी से महामारी फेलने के अंदेषे से जनता में भय व्याप्त था,जनता के भय व षिकायत को देखते हुये महापौर सौम्या गुर्जर ने दिनांक 4.06.2021 को अपने कक्ष में सफाई व्यवस्था हेतु वैकल्पिक व्यवस्थाकरने के लिए एक बैठक रखी जिसमें नगर निगम आयुक्त यज्ञमित्र सिंह व अन्य अधिकारियों को बुलाया। राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 के अनुसार नगर निगम के सभी अधिकारी महापौर के अधीन हाेते है लेकिन आयुक्त यज्ञमित्र सिंह ने महापौर द्वारा बुलाई गई अहम बैठक को बीच मे ही छाेडकर बगैर महापौर से अनुमति लिये उठकर जाने पर महापौर व उपस्थित अन्य पार्षदगणो द्वारा आपत्ति किये जाने पर आयुक्त यज्ञमित्रसिंह आवेष में आ गये तथा महापौर को धमकी दी की कम्पनी के बिलों का भुगतान पहले करना पडेगा, और मैं जा रहा हूॅ। महापौर का कथन था कि कम्पनी के बिलों की जाँच करवाकर ही भुगतान किया जायेगा। लेकिन शहर में सफाई की वैकल्पिक व्यवस्था अत्यावष्यक है, लेकिन आयुक्त अपनी बात पर अडे रहे तथा महापौर के निदेर्ष को मानने से स्पष्ट इंकार कर बैठक को बिना महापौर की अनुमति के छाेड़ कर चले गये। इस प्रकार यज्ञमित्र सिंह आयुक्त का कृत्य गम्भीर दुराचरण की परिभाषा में आताहै। बैठक के बाद आयुक्त ने सोची समझी साजिष के तहत राज्य सरकार के ईषारे पर पुलिस में एक झूठी रिपाेटर् दर्ज करवाई तथा स्वायत्त शासन विभाग में झूठी षिकायत की, जिस पर राज्य सरकार ने पूर्व से निर्धारित साजिष के तहत कनिष्ट अधिकारी रेणु खण्डेलवाल को घटना की जाँच सौप दी। रेणु खण्डेलवाल ने महापौर व अन्य पार्षद गणो को जाँच में सुनवाई का अवसर ही नही दिया, जबकि महापौर व अन्य पार्षदगणो द्वारा जवाब हेतु व साक्ष्य हेतु उचित समय माँगने का प्रार्थना-पत्र, मयमाननीय उच्चतम न्यायालय के द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत जो1972 में सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट के पेज 2538 पर दिया गया था, प्रस्तुत किया।
लेकिन जाँच अधिकारी ने बचाव सुनवाई का अवसर ही प्रदान नहीं किया तथा मात्र 48 घन्टे कीअवधि में दिनांक6.06.2021 को एक तथ्यहीन भ्रामक व विधि विरूद्ध जाँच रिपाेटर् बनाकर सरकार को सौंप दी। उक्त रिपोर्ट को पढने मात्र से हीस्पष्ट है कि उक्त रिपाेटर् सरकार के दबाव में राजनैतिक षडयन्त्र के तहतभारतीय जनता पार्टी की निर्वाचित महापौर व पार्षद गणो को हटाने के कपटपूर्ण आशय से तैयार की गई है। जाँच रिपोर्ट में जाँच अधिकारी पैरा 13 लगायत 20 में महापौर व अन्य पार्षदो के बयान का कथन किया है,जबकि स्पष्ट है कि महापौर ने काेइ बयान व जवाब प्रस्तुत ही नहीं किया मात्र जवाब व साक्ष्य हेतु समय माँगा था। इसी प्रकार जाँच में नगर निगम वरिष्ट अधिकारी श्री बृजेश चादोलिया अतिरिक्त आयुक्त के बयान दर्ज है जिसमें उन्होंने किसी भी प्रकार से आयुक्त के साथ मारपीट होना नही बताया है,
जाँच अधिकारी द्वारा जो निष्कर्ष दिया गया है वहआधारहीन तथा राज्य सरकार के निदेर्ष पर विधि विरूद्ध दिया गया है।3. महापौर द्वारा राज्य कार्य हेतु ही बैठक निगम मुख्यालय में बुलाई गईथी, ऐसे में आयुक्त का बगैर महापौर की अनुमति के जाना राज्य कार्य में बाधा डालना स्पष्ट हाेता है। लेिकन जाँच अधिकारी ने इन तथ्यों पर कोईनिष्कर्ष नहीं दिया।इस प्रकार स्पष्ट रूप से राज्य सरकार ने कानून का दुरूपयोग कियाहै। यह इससे भी स्पष्ट है कि राजस्थान के अलवर शहर में कॉग्रेससमर्थित नगर पालिका व सभापति है जिनके विरूद्ध काेतवाली अलवर मेंप्रथम सूचना रिपोर्ट नं.471/2020 इस आषय की दर्ज कराई गई थी किउन्हाेंने अपने कक्ष में बुलाकर अधिकारी के चाटा मार दिया। उक्त घटनाकी जाँच कराकर राज्य सरकार ने राजस्थान नगर पालिका अधिनियम2009 के तहत जाँच रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्यवाही हेतु पत्रावलीजिला एवं सत्र न्यायाधीष कैडर के अधिकारी को सौंप दी लेिकन वहांसभापति को आज तक निलंबित नहीं किया गया। इससे राज्य सरकार कीदुर्भावना व कानून का दुरूपयोग स्पष्ट है। इसके अतिरिक्त जयपुर कीजाँच रिपाेटर् के अध्ययन मात्र से ही यह स्पष्ट है कि यदि इस जाँच रिपोर्टको समग्र रूप से पढा जाऐं तो सिर्फ धक्का-मुक्की हाेने का कथन हीसामने आता है। फिर भी निलंबन की कार्यवाही राज्य सरकार की स्पष्टदुर्भावना दर्शाता है।माननीय के समक्ष सभी तथ्यों को प्रस्तुत करते हुये निवेदन है कि अविलम्बप्रकरण की जाँच कर राज्य सरकार द्वारा पारित आदेष 6.06.2021 कोअपास्त किया जाकर महापौर श्रीमती सौम्या गुर्जर व पार्षद श्री अजय सिंहचौहान, श्री पारस जैन व श्री शंकर शर्मा का निलम्बन बहाल किया जावे व दोषी अधिकारियों व राज्य सरकार के विरूद्ध कानूनके तहत कार्यवाही कीजावें।इससे पूर्व पार्टी के सभी कार्यकर्ता अजमेरी गेट स्थित तीन बत्ती चौराहा पर एकत्रित होकर जुलुस के रूप में नारेबाजी करते हुए उपखडं अधिकारी कार्यालय पहुंचे।
इस अवसर पर भाजपा नेता राजेन्द्र विनायका, केकडी पंचायत समिति प्रधान होनहार सिंह राठोड,उपप्रधान राजू धाकड जिला देहात सेवा संगठन संयोजक सत्यनारायण चौधरी,महामंत्री रामबाबू सागरिया, महिला मोर्चा जिला उपाध्यक्ष पूनम कंवर राठोड, पूर्व मंडल अध्यक्ष बलराज मेहरचंदानी, वरिष्ठ नेता रामदेव माली,बृह्माणी माता मंडल अध्यक्ष सत्यनारायण गुर्जर,उपाध्यक्ष श्यामसुन्दर शर्मा,महामंत्री विमल टेलर, महेश बोयत,युवा मोर्चा उपाध्यक्ष श्री राम आचार्य,पूर्व पार्षद अमन सोनी, जिला परिषद सदस्य सीताराम खमावत,गिरधर सिंह,आनन्द कीर,महेंद्र गौड,मथुरालाल कहार,कपिल सुवालका आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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