
देवनानी ने इस बात पर अफसोस जताया कि उनकी सिफारिश पर जिन कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी मिली है, उन्हें रलावता अनुचित तरीके से अपने नाम बता रहे हैं। रलावता या अन्य कोई कांग्रेस नेता चाहें, तो संबंधित विभाग से पता कर सकते हैं कि कौन-कौनसे काम किन-किन क्षेत्रों में किस-किस विधायक की अनुशंसा पर मंजूर किए गए हैं। इससे जाहिर हो जाएगा कि जनता के फंड से किसी भी काम की प्रशासनिक मंजूरी जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा पर ही दी जाती है। उन्होंने कहा कि जनता के फंड से होने वाले कार्यों की प्रशासनिक मंजूरी तो सरकार ही देती है। अभी तक अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में 5 करोड की सडकें निर्माण व जल जीवन मिशन के तहत पानी आदि काम हुए हैं, वह विधायक की अभिशंसा पर ही मंजूर हुए हैं। इसका पूरा ब्यौरा विधायक के साथ-साथ संबंधित विभाग के पास भी रहता है।
देवनानी ने कहा कि पूरे प्रदेश के साथ-साथ अजमेर में भी कानून-व्यवस्था पूरी तरह चैपट हो गई है। आए दिन चेन स्नेचिंग, चोरी, डकैती, लूटपाट, बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं, जिनकी तरफ रलावता का कोई ध्यान नहीं जाता है। देवनानी ने कहा कि यदि रलावता अपने आपको इतना ज्यादा ही कद्दावर कांग्रेस नेता मानते हैं, तो पहले अपने संगठन की तरफ ध्यान देकर शहर जिला अध्यक्ष की घोषणा कराकर संगठन को खड़ा कराएं। जनता विभिन्न समस्याओं से त्रस्त हैं। बिजली संकट के साथ पानी का संकट भी झेल रही है, लेकिन रलावता ने जनहित से जुड़े इन मुद्दों पर एक बार भी आवाज नहीं उठाई और ना ही सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने रलावता को सलाह दी है कि वे केवल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी होने के नाते झूठी वाहवाही नहीं लूटें। चुनाव लड़ने का मतलब निर्वाचित जनप्रतिनिधि होना नहीं होता है।