दसलक्षण पर्व के दसवें दिन उत्तम ब्रहचर्य धर्म की पूजन

वैशाली नगर स्थित दिगम्बर जैन मंदिर ऋषभायतन व पुरानी मंडी स्थित सीमंधर जिनालय मैं आज दसलक्षण पर्व के अंतिम दसवे दिवस पर उत्तम ब्रहचर्य धर्म की पूजा आयोजित हुई। इस अवसर पर प्रात 6.30 बजे से जिनेंद्र अभिषेक नित्य नियम पूजन अंनत चतुर्दशी के दिन ही वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक पर वासपुज्य भगवान पूजा के बाद अनन्त तीर्थंकर पूजन ,सोलह कारण ,रत्नत्रय पूजन दसलक्षण पूजन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म विधान् पूजन की गई। इस अवसर पर उपस्थित पूजार्थियो को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का महत्व बताते हुए पंडित सुनील धवल भोपाल ने कहा कि *समस्त धर्मों का राजा ब्रह्मचर्य धर्म है* ब्रह्मचर्य अर्थात ब्रह्म स्वरूप आत्मा में चर्या करना, लीन होना, उसका आस्वादन करना। वह वास्तविक उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है जो उत्तम ब्रह्मचर्य मन लावे,नरसुर सहित मुक्ति फल पावें*
*अर्थात् उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के पालने वाले को मोक्ष-लक्ष्मी की प्राप्ति अवश्य ही होती है*। पर्युषण पर्व के महान अवसर पर जो मनुष्य दस-धर्मों को अपना कर उनका पालन करके अपने जीवन का उद्धार करता है तथा अपने आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करके अजर-अमर पद निर्वाण की प्राप्ति कर सकता है। इसके बाद रात्रि मैं पण्डित सुनील धवल के द्वारा प्रतिक्रमण सामयिक पाठ व प्रवचन हुए ।कल सुबह ऋषभायतन मैं सुबह 7 बजे जिनेंद्र अभिषेक नित्य नियम पूजन क्षमावाणी पूजन के बाद सामूहिक क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा
विजय पांड्या
9783933641

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