ट्रायल कोर्ट के आक्षेपित आदेश को किया अपास्त

ए डी जे 2 केकड़ी कुंतल जैन ने निगरानी याचिका स्वीकार करके ट्रायल कोर्ट के आक्षेपित आदेश को किया अपास्त

केकड़ी 17 अक्टूबर(पवन राठी) राजस्थान वक्फ बोर्ड जयपुर के तत्कालीन चेयरमेन लियाकत हुसैन व दरगाह शरीफ फखरूद्दीन चिश्ती सरवाड़ के मुत्तवली युसुफ शेख के द्वारा धार्मिक स्थल के नाम पर कूटरचित फर्जी रसीदें काट कर अवैध वसूली करने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश केकड़ी द्वितीय कुंतल जैन ने निगरानीकर्ता की दाण्डिक निगरानी याचिका स्वीकार कर विचारण न्यायालय का आक्षेपित आदेश अपास्त किया।
यह है मामला:- सरवाड़ निवासी मोहम्मद रईस पठान ने एडवोकेट आसीफ हुसैन के जरिये न्यायालय में परिवाद पेश कर बताया कि वह ख्वाजा फखरूद्दीन चिश्ती की दरगाह में क्षेत्र में खाना-दाना बनाने का काम करता है। यह दरगाह राजस्थान वक्फ बोर्ड के अधीन आती है तथा इसकी देखरेख के लिए मुत्तवली को बोर्ड नियुक्त करता है। उसने अपने परिवाद में आरोप लगाया कि दरगाह शरीफ के मुतवल्ली यूसुफ शेख ने बोर्ड चेयरमेन लियाकत हुसैन से सांठ गांठ कर जायरीनों से अवैध वसूली कर रहे हैं। वहीं मुतवल्ली युसुफ शेख दरगाह के विकास के नाम पर फर्जी रसीदें काटकर रूपयों की वसूली कर रहा है। दरगाह के गल्ले से होने वाली आमदनी को भी स्वयं खोल रहा है, जबकि उस समय बोर्ड के सदस्यों की मौजूदगी आवश्यक है। उक्त आरोप की शिकायत भी एक अन्य व्यक्ति द्वारा दिनंाक 14 अक्टूबर 2014 को उपखण्ड अधिकारी को भी दी थी। जिसमें जायरीनों से संचालन मण्डल द्वारा मामू साहब की दरगाह के नाम पर 10 से 100 रूपये अवेध वसूल किये जा रहे हैं।
निगरानीकर्ताने अपनी दाण्डिक निगरानी याचिका में बताया कि मुम्बई की मुस्लिम ट्रस्ट ने नगर पालिका सरवाड़ से जमीन खरीद कर बाद में हाजी मन्नान शेख जमीन पर 3 गेट, 16 दुकानें व गेस्ट हाउस बनाकर राजस्थान वक्फ बोर्ड को सुपुर्द कर दिया। निर्माणाधीन दुकानों की लॉटरी निकालकर किराये पर देनी थी, जबकि बोर्ड चेयरमेन व मुतवल्ली युसुफ शेख ने मिलीभगत कर दुकानों को अपने चहेतों को किराये पर दे दिया तथा खुद मुतवल्ली ने दुकानों का उपयोग शुरू कर दिया। मुतवल्ली ने अपने पद का दुरूपयोग कर बोर्ड को लाखों रूपयों का चूना लगा दिया।
लाखों के वारे न्यारे:- निगरानीकर्ता ने अपनी दाण्डिक निगरानी याचिका में बताया कि दरगाह मुतवल्ली युसुफ शेख ने अजयमेरू आगार में डीपो में पम्प चालक कर्मचारी था। आज अरबों का मालिक है व दरगाह में फर्जीवाड़ा करके रूपये कमाये हैं। आरोपी के पास ऐशो आराम के भरपूर साधन है। एक फार्म हाउस, बेशकीमती बंगला, एक कपड़ों का श्योरूम व लक्जरी कार, रेस्टोरेन्ट सहित कई प्रोपर्टीज जो दरगाह में फर्जीवाड़ा कर रूपये बटोर कर बनाई है। उक्त प्रकरण में निगरानीकर्ता द्वारा विचारण न्यायालय में परिवाद पेश किया जिस पर न्यायालय के आदेश पर सरवाड़ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान कर मामले में एफ.आर. लगा दी। निगरानीकर्ता द्वारा धारा 173(8) दण्ड प्रक्रिया संहिता में प्रार्थना पत्र लगा दिया जिसे विचारण न्यायालय ने खारिज किया। निगरानीकर्ता ने इस पर दाण्डिक निगरानी याचिका पेश की। उक्त याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश कुन्तल जैन ने एडवोकेट आसीफ हुसैन के तर्कांे से सहमत होते हुए निगरानीकर्ता की दाण्डिक निगरानी याचिका स्वीकार करते हुए विचारण न्यायालय का आक्षेपित आदेश अपास्त किया।

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