केकड़ी 28 अप्रैल (पवन राठी)
जन्म मरण ये सब दुख के मूल कारण नहीं किन्तु स्व-मोह दुख का कारण है। जिनेन्द्र देव की भक्ति आराधना मनोयोग पूर्वक करने से प्राणी मात्र अपने दुखो से छुटकारा पा सकता है।
बोहरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ जैन मंदिर में विराजित गणिनी आर्यिका विमल प्रभा माताजी ने अपने दैनिक-प्रवचन के दौरान कहे। उन्होने कहा कि भोग उतना बुरा नही है जितना लोभ है, भोग की तो एक सीमा होती है जबकि लोभ अनन्त होता है।
इससे पूर्व क्षुल्लिका माताजी ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि आपसी प्रेम और सम्मान ही उन्नति का कारण बनता है जबकि मोह, द्वेष का कारण बन जाता है। हमे अपने के मूल्य को समझकर इस बहुमूल्य समय का जीवन में सदुपयोग करना चाहिए। जीवन में गुरु का होनाआवश्यक है,गुरु ही हमें सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते है ।
प्रातः आर्यिका ससंघ के सानिध्य में जिनामिषेक एवं
शांतिधारा सम्पन्न हुई।