*भगवान जिला प्रशासन के दावे को फलीभूत करे*

लेकिन जिला कलेक्टर जी, तथ्यों के आधार पर ही जनता को जानकारी दीजिए
-शहरवासी भी आनासागर की जलकुंभी से निजात पाना चाहते हैं
-पहले आनासागर में गंदा पानी गिरा रहे नालों का मुंह एसटीपी की तरफ मोड़िए
-जलकुंभी कभी भी साफ पानी में नहीं, गंदे पानी में ही पनपती है

✍️प्रेम आनन्दकर, अजमेर।
👉अजमेर के जिला प्रशासन ने 25 मई, शनिवार को प्रेसनोट जारी कर दावा किया कि ’’आनासागर अब ले सकेगा खुलकर सांस, जलकुंभी पर नियंत्रण के परिणाम आने लगे हैं सामने, मात्र 16 प्रतिशत क्षेत्र में बची है जलकुंभी।’’ इस दावे के बारे में जारी प्रेसनोट में विस्तार से जिक्र किया गया है, जो हूबहू पेश किया जा रहा है। ’’आनासागर झील को जलकुंभी से जल्द ही राहत मिलने वाली है। प्रशासन द्वारा सम्मिलित रूप से किए गए प्रयासों के परिणाम अब नजर आने लगे हैं। अब जलकुंभी के मात्र 16 प्रतिशत क्षेत्र तक सीमित होने से आनासागर खुलकर सांस लेने लगा है। जिला कलक्टर डॉ. भारती दीक्षित ने बताया कि आनासागर झील से जलकुंभी निकालने का अभियान 20 मार्च, 2024 से अनवरत चल रहा है। इससे लगभग 11 हजार 250 डंपर जलकुंभी की झील से बाहर निकासी की गई है। वर्तमान समय में इस अभियान के अन्तर्गत रीजनल कॉलेज चौपाटी एसटीपी के पीछे तीन पोकलेन एवं होटल लेक हेवन के पीछे डिवीडिंग मशीन कार्यरत है। उन्होंने बताया कि नगर निगम आयुक्त देशल दान के निर्देशन में लगातार कार्य किया गया। नगर निगम की पूरी टीम ने समर्पित भाव से कार्य किया। इसके परिणामस्वरूप वर्तमान में जलकुम्भी का क्षेत्रफल बहुत कम हो गया है। इसको अन्य स्थानों पर फैलने से रोकने के लिए कोटा से विशेष प्रकार का 2800 फीट लम्बा जाल मंगवाकर एसटीपी के पीछे से रीजनल कॉलेज चौपाटी तक जलकुंभी को लॉकिंग किया गया है। इससे हवा के दवाब के कारण जलकुंभी का फैलाव स्थिर रहेगा। हवा के झोंकों से जलकुंभी अन्यत्र छितरी हुई अवस्था में कम से कम होगी। उन्होंने बताया कि झील में ऑक्सीजन स्तर बढ़ाने के लिए जगह-जगह एरिएटर एवं फव्वारे स्थापित किए जा रहे हैं। इन एरिएटर तथा फव्वारों से वायुमण्डलीय ऑक्सीजन जल में घुलनशील होकर ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाएगी। यह जलीय जंतुओं के लिए प्राणदायक होगी। घुलनशील ऑक्सीजन का स्तर बढ़ने से पानी से आने वाली दुर्गन्ध से भी राहत मिलेगी। गर्मी के मौसम में तेज धूप के कारण जलीय शैवालों की कॉलोनी तेजी से बढ़कर जल को दुर्गन्धित कर सकती है। अब ऐसा नहीं होने से चौपाटी का आनन्द लिया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा गठित नगर निगम की विशेष टास्क फोर्स टीम द्वारा भीषण गर्मी में भी दिन-रात किए गए अथक प्रयासों के कारण झील का अधिकांश भाग जलकुंभी मुक्त हो गया है। सागर विहार कॉलोनी, डी-मॉल के पीछे, पुरानी चौपाटी, रामप्रसाद घाट तथा लव कुश उद्यान के आसपास से टापू के आगे लगभग पूर्ण रूप से साफ है। झील का कुल क्षेत्रफल 776 एकड़ (3.14 वर्ग किलोमीटर) है। इसमें से मात्र 0.53 वर्ग किलोमीटर में ही जलकुंभी बची है। यह सम्पूर्ण झील का मात्र 16.87 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि झील में जलकुंभी का फैलाव वर्तमान में रीजनल कॉलेज चौपाटी के आसपास तक सीमित हो गया है। इसे शीघ्र ही नियंत्रण में लेकर बाहर निकालने की कार्रवाई की जा रही है। इस कार्य की ड्रोन फोटोग्राफी करवाई जा रही है। सीसीटीवी कैमरे से भी मॉनिटरिंग की जा रही है। आगामी दिनों में राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट नागपुर एवं राष्ट्रीय बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ की टीम झील से जलकुंभी के नियंत्रण एवं स्थाई समाधान के लिए अजमेर आ रही है। यह टीम निरीक्षण के पश्चात विस्तृत कार्य योजना तैयार कर रिपोर्ट पेश करेगी।’’ यह तो हुई जिला प्रशासन के दावों की बात। जो दावे प्रेसनोट में किए गए हैं, उनमें से एक भी शब्द इधर-उधर नहीं किया गया है।
*अब अपनी बात*

प्रेम आनंदकर
हम ही नहीं, पूरे शहरवासी प्रार्थना करते हैं कि भगवान जिला प्रशासन के दावे को फलीभूत करे, लेकिन यह भी अपेक्षा करते हैं कि जिला कलेक्टर जी, तथ्यों के आधार पर ही जनता को जानकारी दीजिए। शहरवासी भी आनासागर की जलकुंभी से निजात पाना चाहते हैं। जलकुंभी को लेकर बहुत शोर-शराबा हो गया। अब तो जलकुंभी का रोना रोते-रोते शहरवासी भी थक गए हैं। मैं और मेरे अन्य साथी मीडियाकर्मी, जो जलकुंभी के कारण हुई आनासागर की दुर्दशा का चित्रण आए दिन जनता के सामने रखते थे, अब उकता गए हैं। ऐसा लग रहा था, शहरवासी और मीडिया वाले फोकट ही चिल्ला रहे हैं और जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद सो रहा है। अब प्रशासन की कुंभकर्णी नींद खुल गई है।’’ देर आयद-दुरूस्त आयद’’, ’’जब जागो, तब सवेरा’’, कोई बात नहीं, अब तो पूरी मुस्तैदी के साथ प्रायः मृत पड़े आनासागर की देह से हरा कफन हमेशा के लिए हटा दीजिए, ताकि ना केवल आनासागर और उसके अंदर रहने वाले जीव-जंतु भी खुलकर सांस ले सकें, बल्कि चौपाटी पर सुबह-शाम घूमने वालों को भी जहरीली की जगह शुद्ध हवा मिल सके। जिला प्रशासन शायद यह भूल रहा है कि जलकुंभी कभी भी साफ पानी में नहीं, बल्कि गंदे पानी और कीचड़ में ही पनपती है। इसलिए यदि जिला प्रशासन की मंशा एकदम साफ है और वह अपना दायित्व पूरी ईमानदारी से निभाना चाहता है, तो उसे आनासागर को पूरी तरह साफ रखने के लिए सबसे पहले आनासागर में गंदा पानी गिरा रहे नालों का मुंह एसटीपी की तरफ मोड़ना होगा। यह बड़ी ही अफसोस की बात है कि नालों का मुंह एसटीपी की तरफ मोड़ने के बारे में भी पहले गलबयानी की जा चुकी है। जिला प्रशासन जी, सच्चाई से मुंह मत मोड़िए, बल्कि सच्चाई को शिद्दत से स्वीकार कीजिए और यदि कोई खामी रह भी जाए, तो उसे सुधारिए। आंकड़ों का मायाजाल और गलतबयानी से भले ही सरकार की शाबाशी लेने के साथ कार्यवाही से बचा जा सकता है, जनता को गुमराह किया सकता है, लेकिन विधाता तो सब देखता है। इस दार्शनिक ब्रह्म वाक्य पर भी कभी-कभी यकीन कर लिया कीजिए, क्योंकि यह एक ऐसा वाक्य है, जो इंसान को गलत राह पर जाने, झूठ बोलने से बचाता है।

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