*विधायिका के प्रति कार्यपालिका बने जवाबदेह*

-विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा, कार्यपालिका को विधायिका के प्रति जवाबदेही बनना होगा
-दो टूक चेतावनी, कार्यपालिका की विधायी कार्यों में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी
-नया सत्र शुरू होने से पहले पुराने सत्र के प्रश्नों, ध्यानाकर्षण और विशेष उल्लेख के प्रस्ताव के जवाब आवश्यक रूप से भेजने होंगे

प्रेम आनंदकर
👉कार्यपालिका को विधायिका के प्रति जवाबदेही बनना होगा। कार्यपालिका की विधायी कार्यों में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष के वासुदेव देवनानी की यह चेतावनी बिल्कुल सही है। यदि विधायिका ने लापरवाह कार्यपालिका के तार नहीं कसे, तो वह विधायिका को कुछ समझेगी ही नहीं। देवनानी की इस दो टूक चेतावनी का अर्थ अफसरों को अच्छी तरह समझ जाना चाहिए और विधायिका के प्रति पूरी तरह जवाबदेह बनने के लिए सचेत भी हो जाना चाहिए। अभी तक जो रवैया कार्यपालिका चल रहा था, वह अब बिल्कुल भी नहीं चलने वाला है, क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ना खुद अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन के प्रति लापरवाह रहते हैं और ना ही किसी को रहने देते हैं। कुछ दिन पहले देवनानी ने विधानसभा सचिवालय में राज्य के प्रमुख अधिकारियों की बैठक लेते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों से कार्यपालिका विधायी कार्यों को गंभीरता से नहीं ले रही है। विधायकों द्वारा पूछे जा रहे प्रश्नों, ध्यानाकर्षण और विशेष उल्लेख के प्रस्ताव के जवाब नियत समय सीमा में विधानसभा पहुंच जाए, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों का काम है। देवनानी ने कहा कि सोलहवीं विधानसभा का आगामी सत्र शुरू होने से पहले पिछले सत्र में पूछे गए सभी प्रश्नों, ध्यानाकर्षण और विशेष उल्लेख प्रस्ताव के जवाब आवश्यक रूप से प्राप्त हो जाने चाहिए। उन्होंने पन्द्रहवीं विधानसभा के पांच हजार से अधिक प्रश्नों के जवाब प्राप्त नहीं होने पर चिंता जताते हुए कहा कि अधिक प्रश्नों के बकाया जवाबों वाले आठ विभागों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, खान, नगरीय विकास एवं आवासन, राजस्व, शिक्षा, स्वायत शासन, सार्वजनिक निर्माण विभाग और उच्च शिक्षा विभाग हैं। देवनानी ने इन विभागों के अधिकारियों से प्रश्नों के जवाब नहीं आने के कारण पूछे और चिकित्सा विभाग से 1,056 प्रश्नों के जबाब नहीं आने पर नाराजगी जाहिर की। देवनानी ने कहा की विधानसभा की समितियों की कार्यवाहियों को भी प्रशासनिक अधिकारी गंभीरता से लें, ताकि ऑडिट आक्षेपों पर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध समय पर कार्यवाही हो सके। देवनानी ने कहा कि गत चार माह में 1,940 प्रश्नों, 274 ध्यानाकर्षण प्रस्तावों और 85 विशेष उल्लेख प्रस्तावो के जवाब आए हैं। देवनानी ने कहा कि प्रदेश के सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी विधानसभा कार्यों की गंभीरता को समझें। विधायक जनता के प्रति जवाबदेही होते हैं। विधानसभा का सदन संचालन महत्वपूर्ण होता है। लोकतंत्र के लिए विधानसभा में विधायकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के जवाब यथासमय राज्य सरकार से आना आवश्यक होता है। प्रश्नों के जवाब समय पर आए और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होने दी जाए। देवनानी ने अधिकारियों से पूछा कि प्रश्नों के जवाब भेजने में क्या कठिनाई है? क्यों प्रश्नों के जवाब लम्बित रहते हैं। किस स्तर पर विधानसभा के कार्यों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। देवनानी ने कहा कि प्रत्येक विभाग में विधानसभा प्रकोष्ठ संचालित होने के बावजूद भी प्रश्नों के जवाब नहीं आना दुखद है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और विधानसभा के कार्यों का उद्देश्य एक ही है। राज्य सरकार और विधानसभा के अधिकारीगण प्रश्नों के जवाब में आ रही कठिनाइयों को मिलकर दूर करें। देवनानी ने कहा कि लोकतंत्र में जन महत्वपूर्ण होता है। जनता का लोकतंत्र के प्रति विश्वास बनाए रखने में हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। आप और हम सभी मिलकर प्रदेश के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। देवनानी ने कहा कि विधानसभा के सदन संचालन से संबंधित किसी भी कार्य में ढिलाई बरतने वाले अधिकारी व कर्मचारी पर सख्त कार्यवाही होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की कठिनाई हम सभी की कठिनाई है। लेकिन हमें उन कठिनाइयों के हल भी मिलकर निकालने होंगे। उन्होंने हिदायत दी कि भविष्य में प्रश्नों, ध्यानाकर्षण और विशेष उल्लेख के प्रस्ताव के जवाब के संदर्भ में बैठक बुलानी ना पड़ें। उन्होंने बकाया प्रश्नों के जवाब 30 सितम्बर तक आवश्यक रूप से विधानसभा को भेजने के निर्देश दिए। बैठक में मौजूद सभी अधिकारियों ने देवनानी को विश्वास दिलाया कि वे गंभीरतापूर्वक विधायी कार्यों का निस्तारण करते रहेंगे।
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✍️प्रेम आनन्दकर, अजमेर।
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