*केंद्रीय बजट में बिहार और आंध्रप्रदेश को 75 हजार करोड़,पूर्ण बहुमत नहीं होने का दबाव*
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*■ ओम माथुर ■*
*पूर्ण सत्ता और किसी की मदद से मिली सत्ता में यही अंतर होता है। तेलुगु देशम और जनता दल यूनाइटेड की बैसाखियों पर टिकी केंद्र सरकार ने इसका सबूत केंद्रीय बजट में दे दिया है। आंध्र प्रदेश और बिहार को विशेष पैकेज के नाम पर करीब 75000 करोड़ का फंड बजट में दिया गया है।.यानी नीतीश बाबू और चंद्रबाबू नायडू ने सरकार बनाने में मदद की पहली मोटी किस्त वसूल ली है। अबकी बार 400 पार का नारा देकर 240 सीटों पर सिमट जाने वाली भाजपा और मोदी को 10 साल की निरंकुश सत्ता के बाद पहली बार सहयोगियों के दबाव का अहसास हो रहा होगा। मोदी सरकार, मोदी की गारंटी,मोदी है तो मुमकिन है जैसे नारे तो उसे चुनाव नतीजे आने के साथ ही भुला देने पड़े थे। अब बजट में बिहार और आंध्रप्रदेश की झोली भरना सत्ता पर दबाव का बड़ा संकेत है। हालांकि दोनों मुख्यमंत्री अपने-अपने राज्यों के लिए विशेष राज्य की मांग कर रहे थे। लेकिन उसे केंद्र सरकार ने इसे खारिज कर दिया था। लेकिन दोनों को मोटी मदद देकर संतुष्ट रखने का प्रयास जरूर किया गया है।*

*हालांकि सीटों के लिहाज से चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी की संख्या नीतीश कुमार के जेडीयू से ज्यादा है। लेकिन फिर भी उन्हें 15000 करोड़ की आर्थिक मदद पर ही संतोष करना पड़ेगा। सरकार ने आंध्र की राजधानी के विकास के लिए बजट दिया है। नायडू को भी आंध्र प्रदेश के विकास और नई राजधानी को विकसित करने के लिए पैसों की जरूरत है। इसलिए वह भी अभी केंद्र सरकार का पल्ला नहीं छोड़ सकते। ऐसे में दोनों एक- दूसरे की जरूरतें पूरी करती रहेंगे यानी नीतीश और नायडू भाजपा के दामन को थामे रहेंगे, तो मोदी सरकार उनकी मदद में कोई कमी नहीं छोड़ेगी। अब भले ही राहुल गांधी, तेजस्वी यादव जैसे विपक्षी नेता केंद्र सरकार को गिराने या तोड़ने के सपने देखते रहे। लेकिन अभी तो दूर-दूर तक है मुमकिन नहीं लगता। बाकी नीतीश कुमार के बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि वह कब किस तरफ चल देंगे।*
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