अजमेर। विगत 21 जनवरी को लोक भवन जयपुर में आयोजित कुलगुरु समन्वय समिति में लिए गए निर्णय के अनुपम में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में उच्च शिक्षा को भारतीय गुरुकुल परंपरा के मूल्यों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहलें की जा रही हैं। कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने महामहिम राज्यपाल एवं कुलाधिपति को प्रेषित अपने प्रतिवेदन में विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न नवाचारों की जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय को अनुशासन, आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों तथा समग्र व्यक्तित्व विकास पर आधारित शैक्षणिक वातावरण के रूप में विकसित किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय के सभी विभागों एवं अनुभागों में नियमित रूप से प्रार्थना गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं, जिससे शैक्षणिक एवं प्रशासनिक इकाइयों में अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो रहा है। प्रत्येक सोमवार को भरत मुनि मुक्ताकाश रंगमंच में सामूहिक प्रार्थना सभा आयोजित की जाती है, जिसमें अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी तथा विद्यार्थी सहभागिता करते हैं। विश्वविद्यालय के प्रमुख कार्यक्रमों का शुभारंभ हवन के साथ किया जा रहा है, जिससे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को सुदृढ़ आधार मिल रहा है।
परिसर में स्थापित ध्वनि प्रणाली के माध्यम से प्रतिदिन प्रातः एवं सायं गायत्री मंत्र का उच्चारण किया जाता है, जिससे शैक्षणिक वातावरण में शांति और सकारात्मकता का विस्तार हो रहा है। साथ ही, विद्यार्थियों को महर्षि दयानंद सरस्वती के वैचारिक दर्शन, वैदिक मूल्यों एवं नैतिक जीवन दृष्टि से परिचित कराने के लिए एक क्रेडिट मूल्य संवर्धित पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया गया है।
कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने बताया कि इन पहलों के माध्यम से विश्वविद्यालय आधुनिक शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का समन्वय स्थापित करते हुए चरित्र निर्माण, अनुशासन और राष्ट्रीय चेतना से युक्त शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।