आशा पाण्डेय ओझा आशा को मिला गंगा दुलारी शुक्ला स्मृति बाल साहित्य सम्मान
भीलवाड़ा। बाल साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘बाल वाटिका’ के 27वें वार्षिक अधिवेशन के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह एवं विचार गोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से आए 13 बाल साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में 10 राज्यों के साहित्यकारों की सहभागिता रही। अधिवेशन का आयोजन बाल वाटिका के संस्थापक एवं प्रधान संपादक डॉ. भैरूंलाल गर्ग के संयोजन में किया गया।
इस अवसर पर उदयपुर की वरिष्ठ साहित्यकार आशा पाण्डेय ओझा को बाल साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘गंगा दुलारी शुक्ला स्मृति बाल साहित्य सम्मान’ प्रदान किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें ₹11,000 की राशि, सम्मान-पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान किया गया। यह सम्मान डॉ. प्रदीप शुक्ल, लखनऊ के सौजन्य से प्रदान किया गया।
सम्मानित होने वाले अन्य साहित्यकारों में दिल्ली के बालस्वरूप राही को जयप्रकाश भारती शिखर सम्मान, उत्तर प्रदेश के डॉ. मोहम्मद अरशद खान को आनंद प्रकाश जैन शिखर सम्मान, पंजाब की श्रीमती सकीर्ति भटनागर को वैभव कालरा स्मृति बाल साहित्य सम्मान, गुजरात के श्यामलपट पाण्डेय को श्यामसुंदर नागला स्मृति राष्ट्रीय बालवाटिका सृजन सम्मान, मध्यप्रदेश की श्रीमती नीना सिंह सोलंकी को गंगा बाई शर्मा स्मृति राष्ट्रीय बालवाटिका सृजन सम्मान, बीकानेर के मदनगोपाल लढ़ा को लोककवि मोहन मंडेला स्मृति राष्ट्रीय बालवाटिका सृजन सम्मान, छत्तीसगढ़ के गिरिश पंकज को छगननाथ व्यास स्मृति राष्ट्रीय बालवाटिका सृजन सम्मान तथा हरियाणा के डॉ. अशोक बैरागी को टम्मू देवी-सवाईराम प्रजापति स्मृति राष्ट्रीय बालवाटिका सृजन सम्मान प्रदान किया गया।
इसी क्रम में अजमेर की डॉ. पूनम पांडे को केसरदेवी जानी स्मृति राष्ट्रीय बालवाटिका सृजन सम्मान, बिहार के डॉ. दिनेश प्रसाद साह को धीसलाल सेन स्मृति राष्ट्रीय बालवाटिका सृजन सम्मान, देहरादून के श्री मुकेश नौटियाल को डॉ. अनंत ओझा स्मृति राष्ट्रीय बालवाटिका सृजन सम्मान तथा दिल्ली के शिव मोहन यादव को जगदीश भारती स्मृति राष्ट्रीय बालवाटिका सृजन सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में बाल साहित्य के विविध पक्षों पर विचार गोष्ठी भी आयोजित हुई, जिसमें साहित्यकारों ने वर्तमान समय में बाल साहित्य की भूमिका, बाल मनोविज्ञान, संस्कार एवं जीवन-मूल्यों से जुड़े साहित्य की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए। देश के विभिन्न अंचलों से आए साहित्यकारों की उपस्थिति ने अधिवेशन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
इस अवसर पर मंच पर अनेक साहित्यकार एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। डॉ. भैरूंलाल गर्ग ने सभी सम्मानित साहित्यकारों को शुभकामनाएँ देते हुए बाल साहित्य को नई पीढ़ी के संस्कार एवं संवेदनशील निर्माण का सशक्त माध्यम बताया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, बाल साहित्य प्रेमियों एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथियों ने सहभागिता की।
इस प्रकार बाल वाटिका का 27वाँ वार्षिक अधिवेशन सम्मान, विमर्श और बाल साहित्य के प्रति प्रतिबद्धता का सार्थक आयोजन बनकर सामने आया।