*जय हिंद! जय ई.एफ.आर.!*
मैं, *अवकाश प्राप्त हवलदार श्री गोपाल नेवार, ई.एफ.आर. सलुआ, खड़गपुर*, आप सभी को यह बताते हुए अपार हर्ष महसूस कर रहा हूँ कि हमारी गौरवशाली *ई.एफ.आर. प्रथम बटालियन 1 नवंबर 2026, रविवार को अपने 120वें वर्ष में प्रवेश करने जा रही है।* यह हम सभी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि, सम्मान और गौरव का क्षण है।इसी गौरवमयी अवसर पर, मैं अपनी स्वरचित कविता *”वफादारी और बहादुरी”* आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ।
*कविता का शीर्षक: “ई.एफ.आर. के वीर जांबाज”*
लहू में जिनके हौसले भरे होते हैं,
दिलों में जिनके हिन्दुस्तान बसे होते हैं,
वो कोई और हो नहीं सकता,
वो सिर्फ ई.एफ.आर. के जवान होते हैं।
1907 में जो ज्योति जली है,
आज भी शान से जल रही है,
वफादारी और बहादुरी निभाते हुए,
एक सौ बीस सालों से अडिग खड़ी है।
ई.एफ.आर. के वीर जांबाज,
माँ-माटी की रक्षा करना बखूबी जानते हैं,
न झुकते हैं, न रुकते हैं,
आँधियों में भी अड़े रहते हैं।
जब ई.एफ.आर. ड्यूटी पर तैनात होते हैं,
दुश्मन भय से थर-थर कांपते हैं,
जहाँ-जहाँ पड़े कदम ई.एफ.आर. के,
वहाँ अमन और शांति लौट आते हैं।
सलाम है ऐसी पावन धरती सलुआ को,
जहाँ ई.एफ.आर. के वीर जांबाज बसते हैं।
*जय हिंद! जय ई.एफ.आर.!*
*निवेदक:*
*रिटायर्ड हवलदार श्री गोपाल नेवार* Gopal Newar Ganesh
*ई.एफ.आर. प्रथम बटालियन, सलुआ, खड़गपुर (प. बंगाल)*