“कान में रुई डालकर बैठी है भारत सरकार और राज्य सरकार! नाथी का बाड़ा बना RCDF, पोपा बाई का राज; कुम्भकर्णी नींद में सोए हुक्मरानों ने पशुपालकों को किया बर्बाद!”
अजमेर। अजमेर डेयरी के अध्यक्ष श्री रामचंद्र चौधरी जी ने वर्तमान भारत सरकार और राज्य सरकार की किसान व पशुपालक विरोधी नीतियों, कुप्रबंधन और भारी लेटलतीफी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। दोनों सरकारों की घोर विफलताओं पर सीधा कटाक्ष करते हुए उन्होंने मशहूर कहावत चरितार्थ की है- “अंधेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा।” चौधरी जी ने दो टूक शब्दों में कहा कि आए दिन राज्य सरकार और भारत सरकार देश व प्रदेश के पशुपालकों को केवल ‘मुंगेरी लाल के हसीन सपने’ दिखा रही है, जबकि धरातल पर पशुपालकों के सामने अनेकों ज्वलंत समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं जिनका कोई समाधान नहीं हो रहा है।
कथनी और करनी में आसमान-जमीन का अंतर: लम्पी और बीज के नाम पर छलावा
सरकार की योजनाओं को ‘नीम हकीम खतरे जान’ बताते हुए डेयरी अध्यक्ष ने कहा कि गायों में लम्पी डिजिज (Lumpy Disease) की रोकथाम हेतु 12 साल के लंबे अंतराल के बाद भी कारगर काऊ पॉक्स (Cowpox) इंजेक्शन प्रारम्भ नहीं किया गया है। इसकी बजाय केवल गोट पॉक्स (Goat Pox) इंजेक्शन ही धड़ल्ले से चलाया जा रहा है, जो कि इस बीमारी में बिल्कुल भी कारगर नहीं है। वहीं दूसरी ओर, यह ‘चिराग तले अंधेरे’ जैसी स्थिति है कि भारत सरकार के पास स्वयं के 113 कृषि फार्म मौजूद हैं, परन्तु आज तक किसी भी कृषि फार्म पर रिजके का 1 साला या 3 साला बीज तैयार या उत्पादित नहीं किया गया है। इसके फलस्वरूप पशुपालकों के लिए ‘कंगाली में आटा गीला’ हो गया है, क्योंकि बाजार में उन्हें 1 सालाना बीज 800 रुपये प्रति किलो और 3 सालाना बीज 1200 रुपये प्रति किलो के मनमाने दामों पर खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। यह आज़ादी के बाद रिजके के बीज की सर्वोच्च कीमत है!
हाथी के दांत खाने के और, दिखाने के और: पशुपालन योजनाओं का खोखलापन
चौधरी जी ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार की घोषणाएं ‘खोदा पहाड़ और निकली चुहिया’ के समान हैं। भारत सरकार ने 12 साल में आज तक FMD (खुरपका-मुंहपका) सिंगल टीका युद्ध स्तर पर प्रारम्भ नहीं किया है। इसके कारण पशुपालकों को दो-दो बार टीके लगवाने पड़ रहे हैं, जिससे दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन पर भारी नकारात्मक असर पड़ रहा है। इसी तरह, भारत और राज्य सरकार बार-बार पशुपालकों को लुभाने के लिए मुंगेरी लाल के हसीन सपने दिखा रही है कि पशु खरीदने पर वे अनुदान देंगे या खरीद मूल्य के ब्याज पर भारी छूट देंगे। परन्तु धरातल पर आकर देखें तो यह महज़ एक ‘थोथी घोषणा’ साबित हुई है। जबकि इसके विपरीत, पूर्व की कांग्रेस सरकार के समय पशु खरीदने पर नाबार्ड (NABARD) के माध्यम से भारत सरकार द्वारा सामान्य जाति को 25% और SC/ST जातियों को 33% तक का अनुदान दिया गया था। इससे देश में लाखों पशु खरीदे गए थे और अकेले अजमेर जिले में 50,000 गाय-भैंसें अन्य राज्यों से खरीद कर लाई गई थीं।
रोम जल रहा है और नीरो बंसी बजा रहा है: कुम्भकर्णी नींद में सोई सरकारें
डेयरी अध्यक्ष ने भारत सरकार और राज्य सरकार की लेटलतीफी को उजागर करते हुए कहा कि पूरा सिस्टम ‘कुम्भकर्णी नींद’ में सोया हुआ है। देश के विभिन्न जिला दुग्ध संघों एवं राज्य स्तरीय फेडरेशन में तकनीकी अधिकारियों के लाखों पद खाली पड़े हैं, लेकिन भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा इन्हें भरने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। यह ‘दीये तले अंधेरा’ ही है कि राज्य सरकार द्वारा मई, जून, और जुलाई माह का ‘मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना’ के तहत दिया जाने वाला 5 रुपये प्रति लीटर का अनुदान गत 5 माह से बकाया चल रहा है! इससे प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों का लगभग 250 करोड़ रुपये सरकार पर बकाया हो चुका है। इतना ही नहीं, मिड-डे मील का लगभग 250 करोड़ रुपये का भारी-भरकम भुगतान भी एक वर्ष से लम्बित पड़ा है। आने वाले समय में नवरात्रा और दीपावली के बड़े त्यौहार हैं; इसके अतिरिक्त पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था, फसलों की कटाई एवं नई फसलों की बुवाई आदि कार्यों के लिए किसानों को पैसों की भयंकर आवश्यकता है, परन्तु कुम्भकर्णी नींद में सो रही इस सरकार को किसानों की पीड़ा नज़र नहीं आ रही है।
अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारना: कान में रुई डालकर बैठी है भारत और राज्य सरकार
सरकारी हठधर्मिता पर तीखा प्रहार करते हुए रामचंद्र चौधरी जी ने कहा कि दोनों सरकारें पूरी तरह से ‘कान में रुई डालकर बैठी हैं’। अजमेर, भीलवाड़ा, जयपुर आदि दुग्ध संघों द्वारा अन्य जिला दुग्ध संघों का दूध से पाउडर निर्माण का कन्वर्जन चार्ज पिछले 2 वर्षों से मात्र 30 रुपये प्रति किलो की दर से दिया जा रहा है। जबकि नेचुरल गैस, पैकिंग मटेरियल आदि की महंगाई के हिसाब से गणना की जाए तो उपरोक्त कन्वर्जन चार्ज 30 रुपये के स्थान पर 49 रुपये हो चुका है। इसकी दर बढ़ाने हेतु राज्य सरकार से बार-बार अनुरोध करने पर भी सरकार टालमटोल की नीति अपना रही है, जिससे जिला संघों को करोड़ों रुपये की हानि उठानी पड़ रही है। वहीं दूसरी ओर, सरस घी के भाव अमूल, मदर डेयरी, मधु एवं अन्य ब्रांडों की तुलना में 1500 रुपये प्रति टिन सस्ती दर पर बिक रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इस अव्यवस्था से पूरे प्रदेश में 100 से 200 करोड़ रुपयों की भयंकर हानि हो चुकी है। फिर भी कान में रुई डालकर बैठी राज्य सरकार सरस घी की दरें नहीं बढ़ा रही है, जिससे जिला संघ आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद हो रहे हैं।
रक्षक ही भक्षक: नाथी का बाड़ा बना RCDF और पोपा बाई का राज
अंत में RCDF (राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन) में व्याप्त घोर अराजकता की पोल खोलते हुए चौधरी जी ने कहा कि सरकार सिर्फ ‘हवाई किले बांध रही है’। राज्य सरकार पशुपालकों के लिए यह कहकर हवाई किले बांध रही है कि हम पशुपालकों की आय दुगनी कर रहे हैं; जबकि असलियत इसके उलट है। गत वर्षों में ‘सरस सुरक्षा कवच योजना’ के अंतर्गत पशुपालकों का 5 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा किया जाता रहा है, परन्तु इस वर्ष तथाकथित प्रबंध संचालक श्रीमती श्रुति भारद्वाज की ‘कृपा’ से यह जीवनदायिनी योजना ही बंद कर दी गई है! इससे लाखों पशुपालकों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
इन सभी उपरोक्त अव्यवस्थाओं, कुप्रबंधन और तानाशाही रवैये को देखते हुए श्री चौधरी ने स्पष्ट निष्कर्ष निकाला कि वर्तमान में RCDF में किसी नियम-कानून का नहीं, बल्कि ‘पोपा भाई का राज’ चल रहा है। यह गौरवशाली संस्था आज पूरी तरह से ‘नाथी का बाड़ा’ बन चुकी है, जहाँ किसानों और पशुपालकों की आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं है।