भाजपा की कथनी और करनी में भारी अंतर — कैलाश झालीवाल

भाजपा की कथनी और करनी में भारी अंतर, विरोध की आवाज दबाने के लिए मुकदमों का सहारा लेना दुर्भाग्यपूर्ण — कैलाश झालीवाल
2012 में कांग्रेस कार्यालय में घुसकर कालिख पोतने और मारपीट करने के मामले में आज तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर उठाए सवाल।
अजमेर। 18 अक्टूबर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव कैलाश झालीवाल ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया कि भाजपा की कथनी और करनी में भारी अंतर है। भाजपा के नेता लोकतंत्र, कानून और नैतिकता की बातें करते हैं, लेकिन जब विपक्ष जनहित के मुद्दों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करता है, तो उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज करवाकर उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जाता है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए चिंताजनक है।
झालीवाल ने कहा कि शनिवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पाकिस्तान के समर्थन में बयान के विरोध में युवक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस बयान को देश की भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए विरोध जताया था। इसके बाद भाजपा शहर अध्यक्ष रमेश सोनी द्वारा प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाना काला कारनामा बताता है,भाजपा की दोहरी राजनीति को उजागर करता है।
कैलाश झालीवाल ने रमेश सोनी को फरवरी 2012 की घटना याद दिलाते हुए कहा कि उस समय भाजपा से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मदन निवास स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर और अंदर घुसकर कालिख पोतने, कार्यालय प्रभारी गोपाल शरण के साथ मारपीट करने तथा उनका मोबाइल फोन छीनकर ले जाने के आरोप लगे थे। इस मामले में तत्कालीन उपाध्यक्ष कैलाश झालीवाल ने कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज करवाया था। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी, फिर भी इस मामले में आज तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि कानून सबके लिए समान है, तो पुराने मामलों में भी निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए थी।
उन्होंने वर्ष 2006 की एक अन्य घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा शासनकाल में दो मंत्रियों के सामने भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर कांग्रेस कार्यकर्ता अशोक सुकरीया के साथ मारपीट करने के आरोप लगे थे। इस संबंध में क्लॉक टावर थाने में मामला दर्ज करवाया गया था। झालीवाल ने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने कार्यकर्ताओं के आचरण पर भी समान रूप से जवाबदेही तय करनी चाहिए।
उन्होंने वर्ष 1991 में पूर्व विधायक बाबूलाल सिंगारिया की गाड़ी पर हमले और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की घटना का भी उल्लेख किया। साथ ही, उन्होंने हाल ही में पीयूष सुराणा और अन्य संबंधित व्यक्तियों से जुड़े घटनाक्रम का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि थाने में स्याही फेंकने और जानलेवा प्रयास से संबंधित गंभीर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई को लेकर सवाल बने हुए हैं। इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
कैलाश झालीवाल ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना अपराध नहीं है। यदि किसी प्रदर्शन के दौरान कानून का उल्लंघन हुआ है, तो पुलिस को निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन एक पक्ष के खिलाफ तुरंत मुकदमे दर्ज हों और दूसरे पक्ष से जुड़े पुराने मामलों में कार्रवाई न होने के सवाल उठते रहें, तो यह कानून के समान अनुपालन पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि आज देश में चुनाव आयोग की निष्पक्षता, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और सरकारी तंत्र के कथित राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस इन मुद्दों पर जनता के बीच अपनी बात रखती रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक असहमति को दबाने के बजाय सरकार और भाजपा नेताओं पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।
अंत में झालीवाल ने भाजपा शहर अध्यक्ष रमेश सोनी से सवाल किया कि यदि कांग्रेस कार्यकर्ताओं का शांतिपूर्ण प्रदर्शन उन्हें गलत लगता है, तो वर्ष 2012 में कांग्रेस कार्यालय में हुई घटना पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उन्होंने मांग की कि सभी संबंधित मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए, लंबित शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई हो और राजनीतिक विरोध के आधार पर किसी भी कार्यकर्ता के साथ भेदभाव न किया जाए।
कैलाश झालीवाल 
सचिव 
 प्रदेश कांग्रेस कमेटी राजस्थान 
9351718975

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