दूसरों के प्रति रखें मैत्री भाव : भाईश्री

ramesh bhai-सुमित सारस्वत- ब्यावर, 13 दिसंबर। श्रीमद् भागवत कथा आयोजन के तीसरे दिन नारायण आश्रम में प्रवचन देते हुए अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पूज्य रमेश भाई ओझा ने कहा कि आचार्यों के बताए पर चलने से जीवन का कल्याण हो जाता है। भटके हुए इंसान का कल्याण करने के लिए सहयोग का हाथ बढ़ाएं। देश में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है जिनमें बुद्धि तो पर्याप्त है मगर चरित्र की कमी है। ऐसे अधम लोग संसार का नुकसान कर रहे हैं। भाईश्री ने कहा कि इंसान के मन में नित्य ऐसी भावना रहे कि सद्कर्म करें। दूसरों के प्रति मैत्री भाव रखें। सकल जग का कल्याण हो। जहां मैत्री भाव है वहां करुणा स्वाभाविक है। महाराज ने ‘मैत्री भाव रो पवित्र झरनो…Ó गीत से दूसरों के प्रति दया भाव रखने का संदेश दिया।
भाईश्री ने कहा कि जिसमें बुद्धि और शुद्धि का सामंजस्य है वही आचार्य है। आचार्य परंपरा व संत परंपरा पर ही सनातन संस्कृति आधारित है। उन्होंने कहा कि बलात्कार करने वाला राक्षस होता है। इंसान स्नान करके तन तो शुद्ध कर लेता है मगर मन गंदा है। मन को शुद्ध करने के लिए भागवत कथा का श्रवण जरूरी है। कलिकाल में जप, तप, साधन अपनाने की योग्यता मनुष्य में नहीं है। भाईश्री ने कहा कि विश्व में धर्म के नाम पर झगड़े हो रहे हैं। अनुचित-उचित की चिंता किए बिना जो पिता की आज्ञा का पालन करता है वह स्वर्ग को प्राप्त करता है। पिता की आज्ञा का पालन करने वाले राम को भगवान कहा जाता है और उल्लंघन करने वाले प्रहलाद को भक्त कहा जाता है। राम को सिखना है तो मर्यादा सीखो। बुद्ध से करुणा सीखो। युद्ध में जीत के लिए दुश्मन की कमजोरी पर प्रहार करो। महाराज ने ‘हे गोपाल राधाकृष्ण गोविंद गोविंद.., राधेकृष्ण राधेकृष्ण…Ó भजन सुनाए तो श्रोता झूम उठे। मंच संचालन रमेश बंसल व राधेश्याम डाणी ने किया।
_DSC0735कथा प्रारंभ होने से पूर्व आयोजक माणकचंद जिंदल, अशोक कुमार, विजय बहादुर, श्यामसुंदर, देवकी, उषा, पुष्पा, सरोज, रेखा, नरेश बजाज, हनुमान चौधरी, आलोक गुप्ता, संदीप जैन, महेंद्र सलेमाबादी, पुष्पा गर्ग, राजदुलारी गर्ग, कीर्ति, कामिनी गोयल, सुंदर देवी, प्रेमलता मोर, आरती अग्रवाल, नीतिशा गर्ग, अंकिता जिंदल, अवली, साक्षी, संतोष शर्मा, मुन्नीदेवी गोयल, आशा गोयल, द्रोपदी बजाज, कैलाशी देवी, आशा अग्रवाल, इंदु गर्ग, कैलाश गोयल, विशम्बर अग्रवाल, अनुज अग्रवाल, विजय अग्रवाल, सुमित अग्रवाल, गोपाल गर्ग, नंदनी, राजीव अग्रवाल ने महाराज का स्वागत कर आशीर्वाद लिया।

तिजोरियों में भरा है धन
भाईश्री ने कहा कि देश में गरीबी इसलिए बढ़ रही है क्योंकि पूंजीपतियों ने धन को तिजोरियों में भरकर छुपा रखा है। यही वजह है कि गरीब को दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो रही है। अपना और परिवार का पेट पालने के लिए गरीब को चोरी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि संपत्ति संग्रह के लिए नहीं, सदुपयोग के लिए होती है। संग्रह करना पाप है। इस पाप का प्रायश्चित दान है। महाराज ने स्पष्ट किया कि दान उपकार नहीं, इंसान का कत्र्तव्य है। सुपात्र को दिया गया दान ही सात्विक दान होता है।

ऐसे झूठ निंदनीय नहीं…
महाराज ने कहा कि हर इंसान को सत्य बोलना चाहिए। कुछ विशेष परिस्थितियों में बोला गया झूठ निंदनीय नहीं होता है। उन्होंने बताया कि पत्नी से निर्दोषता पूर्वक बोला गया झूठ, विवाह कार्य बिगडऩे से रोकने के लिए बोला गया झूठ, किसी की रक्षा के लिए बोला गया झूठ गलत नहीं है। भाईश्री ने कहा कि सत्य कभी कैद नहीं होता है। सत्य जरूरी है लेकिन सत्य की रक्षा के लिए बोला गया असत्य पाप नहीं है। सत्य अखंड है। अंधविश्वास भ्रामक शब्द है। विश्वास कभी अंधा नहीं होता है। महाराज ने व्यंग्य करते हुए ‘तेरे जैसी दुनिया में सुंदर कोई नहीं..Ó प्रसंग सुनाया तो सभी मुस्कुराने लगे।

संतत्व प्राप्त करना कठिन
भाईश्री ने कहा कि साधुता वेशभूषा के अधीन नहीं है। साधु कहलाना आसान है, बनना मुश्किल। जो दूसरों में सद्गुण और स्वयं में दुर्गुण देखे, वही सच्चा संत-साधु पुरूष है। संत दूसरों को सम्मान देता है। कृष्ण का चरित्र कविता की भांति विस्तृत है। कृष्ण धर्म की रक्षा के लिए विवेक से निर्णय लेते हैं। कृष्ण जो कहते हैं, करते हैं वो ग्रंथ बन जाता है। भाईश्री ने संदेश दिया कि कृष्ण से प्रेम करो। कृष्ण को गाओ, कृष्ण को पाओ।

प्रेम की पीड़ा मीरा जाने…
प्रेम की व्याख्या करते हुए भाईश्री ने कहा कि प्रेम ही जीवन है। प्रेम अजर-अमर है। प्रभु को भी प्रेम प्यारा है। मन में प्रेम की ज्योति जगमग दीवाली जैसा आभास कराती है। ‘प्रेम की पीड़ा मीरा जाने, या जाने वो राधा, राधा-राधा कहते प्राणी कट जाएगी बाधा..Ó भजन गाया तो भाव में डूबे कई भक्तों की आंखों से अश्रुधारा बहने लगी।

निसदिन बरसे नैन हमारे…
भाईश्री ने ‘निसदिन बरसे नैन हमारे..Ó गीत के जरिए संदेश दिया कि कहा कि किसी के विरह में रोना जिंदगी है। आंसू ही संपत्ति है। रोने का सुख प्रेमी ही जानता है। सच्चा प्रेमी कभी आंसूओं का बंटवारा भी नहीं करता। लोगों को जगत दिखता है मगर परमात्मा नहीं दिखते। इंसान सांसारिक मोह-माया में फंसा है। जब संभलता है तब तक प्राण निकल जाते हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा अनुभूति का विषय है। परमात्मा से प्रेम करो।

सत्य ही सच्चा तप
भाईश्री ने श्रोताओं को सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सत्य ही सच्चा तप है। सत्य सृष्टि का पालन करता है। सत्य का साथ कभी नहीं छोड़ें। सत्य का पालन करना प्रत्येक मनुष्य का धर्म है। झूठ भले ही कठिन हो मगर सत्य सरल है।

पीएम मोदी की सराहना
कथा के मध्य महाराजश्री ने योग का महत्व बताया। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि मोदी के प्रयासों से हर साल 21 जून को विश्व योग दिवस मनाया जाएगा। यूएनओ ने इसे समर्थन देते हुए इसकी घोषणा की है।

कुत्ते से सावधान
महाराज ने गिरते नैतिक मूल्यों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वक्त में मानव के नैतिक मूल्य में गिरावट आ रही है। अधिकांश घरों के बाहर लिखा होता है ‘कुत्ते से सावधानÓ। इस स्लोगन के पास ही मकान मालिक खड़ा हो जाता है। हमें समझदार बनते हुए इस व्यवस्था को बदलना चाहिए।

स्वच्छता अभियान में बनें भागीदार
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से चलाए जा रहे स्वच्छ भारत अभियान के तहत ब्यावर में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव समिति भी सेवा कार्य करेगी। इस पुनीत कार्य में अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पूज्य रमेश भाई ओझा के साथ सैंकड़ों कार्यकर्ता भागीदार बनेंगे। सोमवार को प्रात: 9 से 11 बजे तक भारत माता सर्किल क्षेत्र में सफाई कार्य में श्रमदान किया जाएगा। भाईश्री ने इस पुण्य कार्य में आमजन से भागीदार बनने की अपील की है। गौरतलब है कि भाईश्री गुजरात राज्य में स्वच्छ भारत अभियान के ब्रांड एम्बेसडर हैं।

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