वर्तमान में जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति को राष्ट्र के समुख प्रचारितः- प्रेम शुक्ला

Shastri nagar pic 2अजमेर 25 मार्च। शास्त्री नगर विकास समिति द्वारा लाल बहादुर शास्त्री सामुदायिक भवन में आयोजित ‘‘क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता राष्ट्रहित से अधिक महत्वपूर्ण है?’’ विषय पर व्याख्यान कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप मंे प्रेम शुक्ला वरिष्ठ पत्रकार मुम्बई ने कहा कि वर्तमान में जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति को राष्ट्र के समुख प्रचारित किया जा रहा है। वह पूरी तरह से गलत है एवं राष्ट्र की एकता व अखण्डता के लिये खतरा है। उन्होंने संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की व्यवस्था है परन्तु प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पहला संविधान संशोधन ही अभिव्यक्ति की आजादी की धारा 19 (अ) में संशोधन किया। इस संदर्भ में उन्होंने रमेश थापर के विरूद्ध दर्ज मुकदमे का उल्लेख किया।सन् 1975 में इन्दिरा गांधी ने पूरी तरह सेंशरशिप लगाकर अभिव्यक्ति का अधिकार सरकार ने अपने पास ले लिया। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश में अस्थिरता फैलाने की कुचेष्टा को कतई मंजूर नहीं किया जा सकता। सरदार पटेल, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने भी इसी मत का समर्थन किया। निरूंकुश मीडिया पर अंकुश लगाना राजधर्म है। सबसे पहले विश्व के सबसे पुराने देश अमेरिका ने भी मीडिया के लिये कोल्ड ऑफ कंडेक्ट बनाया। जिसमें यह तय किया गया कि मीडिया यह सुनिश्चित करना होगा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर राष्ट्रहित प्रभावित ना हो।
विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए सोशल मीडिया से जुड़े श्री जनार्दन मिश्रा ने लोगों से आग्रह किया कि अधिक से अधिक लोग सोशल मीडिया से जुड़े है ताकि वे अपने विचार स्वतंत्र रूप से रख सके। उन्होंने लोगों से राष्ट्र भावना का प्रचार करने का आग्रह किया।
अध्यक्ष लियाकत हुसैन ने आये हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम के अंत में आनन्द सिंह राजावत ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर शहर के अनेक प्रभुध नागरिक उपस्थित थे।

आनन्द सिंह राजावत
संयोजक
9214591378

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