युवा रचनाकारों को मिलेगी अभिव्यक्ति

अ.भा.साहित्य परिषद् देगी अवसर
अजमेर/सभी भारतीय भाषाओं के लेखकों और मनीषियों की संस्था अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की अजमेर जिला ईकाई की रविवार 01 अप्रैल को गुजराती विद्यालय में आयोजित बैठक में निर्णय लिया गया कि परिषद् शीघ्र ही जिले के युवा रचनाकारों को अभिव्यक्ति का अवसर प्रदान करेगी। महामंत्री गोविन्द भारद्वाज ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष परिषद् भाषायी साहित्य और युवा रचनाकारों के प्रोत्साहन हेतु विशेंष अभियान चलाएगी। साहित्य की किसी भी विधा में सर्जन करने वाले विद्यालय, महाविद्यालय के विद्यार्थी व अन्य युवाओं के लिए ‘युवा रचनाकार सम्मेलन‘ का आयोजन किया जाएगा। साथ ही विविध विधाओं से जुड़े लेखकों हेतु लेखन कार्यशालाओं सहित नवसर्जन गोष्ठियों का आयोजन भी होगा जिनमें सभी भाषाओं के सहित्यकार भाग ले सकेंगे। अध्यक्ष कुलदीपसिंह रत्नू ने बताया कि राष्ट्रीय सदस्य डॉ बद्रीप्रसाद पंचोली की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह भी तय हुआ कि अन्य राज्यों के प्रसिद्ध साहित्यकारों के साथ स्थानीय लेखकों के संवाद हेतु भी कार्यक्रम होगे।
काव्यगोष्ठी में जमा रंग- इस अवसर पर काव्य गोष्ठी भी हुई जिसमें डॉ ंछाया ने हिन्दी तथा कुलदीप सिंह रत्नू ने राजस्थानी भाषा सरस्वती वन्दना सुनाई। युवा कवियित्री श्रुति गौतम ने ‘तुम भाषा हो मेरी पर बिल्कुल माँ जैसी लगती हो‘ के द्वारा हिन्दी का गुणगान किया। डॉ बृजेश माथुर ने ‘सबके दुःख में शामिल होकर करते रिश्तों की तुरपाई‘, गोविन्द भारद्वाज ने ‘जिंदगी पतंग की एक डोर सी है‘, डॉ ध्वनि मिश्रा ने‘ख्वाब आँखों में सजाए हैं तो जिंदा तुम हो‘, उमेश कुमार चौरसिया ने ‘विचार जिन्दा रखना है तो बुजुर्गाें का हाथ थामे रहो‘, डॉ सुनिता जैन ने ‘सुख और दुःख मिले इस तरह की गज़ल हो गयी‘, डॉ विष्णु दत्त शर्मा ने ‘नये साल की शुभकामनाएं कविताएं सुनाई। डॉ बद्रीप्रसाद पंचोली ने संस्कृत कविता सुनाई और डॉ अनिता खुराना ने वेद का राष्ट्रगीत माने जाने वाले मंत्र का स्वरचित कवितानुवाद सुनाकर गोष्ठी को प्रभावी बनाया। डॉ जयदेव, डॉ राजेश शर्मा इत्यादि ने भी विचार रखे।

गोविन्द भारद्वाज
जिला महामंत्री
संपर्क-9461020491

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