शारीरिक दर्द नजरअंदाज करना मतलब रोग बढ़ाना
अजमेर, 7 अप्रेल(.)। रीढ़ की हड्डी व नसों के कारण होने वाले किसी भी शारीरिक दर्द एवं तकलीफ को टाल कर बढ़ाएं नहीं, समय पर उपचार लें। यह निष्कर्ष ब्यावर श्री सीमेन्ट की रास यूनिट में वल्र्ड हैल्थ डे पर आयोजित न्यूरोलाॅजी सेमिनार में निकला। सेमिनार का आयोजन मित्तल हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर अजमेर व श्री सीमेन्ट ब्यावर की रास यूनिट के संयुक्त तत्वावधान में वल्र्ड हैल्थ डे के अवसर पर किया गया।
सेमिनार के मुख्य वक्ता मित्तल हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के ब्रेन व स्पाइन रोग विशेषज्ञ डाॅ. सिद्धार्थ वर्मा थे। कमर के निचले हिस्से में दर्द व सियाटिका से बचाव व उपचार विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सामान्य जीवन में उठने, बैठने, चलने, सोने, वस्तु उठाने, कूदने, गिरने आदि छोटे-छोटे कारण बढ़ती उम्र में रीढ़ की हड्डी व नसों में होने वाले परिवर्तनों के चलते लोगों में तकलीफ का स्रोत बन जाते हैं। इस तकलीफ को नजरअंदाज करने व समय पर निदान नहीं होने से यह और अधिक बढ़ जाती है। जिसका प्रभाव शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ने लगता है।
महाप्रबंधक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डाॅ. राकेश शर्मा ने बताया कि न्यूरोलाॅजी पर आयोजित सेमिनार में श्री सीमेन्ट रास यूनिट के सभी अधिकारी, कर्मचारीगण उपस्थित थे। सेमिनार में डाॅ वर्मा ने पावर प्रजेंटेशन की सहायता से रीढ़ की हड्डी की वजह से गर्दन में दर्द, कमर में दर्द, हाथ पैरो में दर्द, हाथ पैरों में कमजोरी, हाथ पैरों में सुन्नपन आदि नसों की तकलीफ पर विस्तार से प्रकाश डाला। मित्तल हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के पीआरओ नितेश भारद्वाज ने सभी का आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि डाॅ सिद्धार्थ वर्मा मित्तल हाॅस्पिटल में न्यूरो सर्जन हैं, ब्रेन हेमरेज, ब्रेन ट्यूमर, सिर व रीढ़ की हड्डी में चोट, सियाटिका आदि रोगों के उपचार की विशेष दक्षता रखते हैं।
मित्तल हाॅस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर अजमेर संभाग का एकमात्र एनएबीएच मान्यता प्राप्त हाॅस्पिटल है जहां एक ही छत के नीचे समस्त सुपरस्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। राज्य सरकार की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत सुपरस्पेशियटी चिकित्सा सेवाओं में उपचार के लिए भी मित्तल हाॅस्पिटल अधिकृत है।